बिहार के CM नीतीश कुमार ने सोमवार, 16 फरवरी को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 25 लाख महिलाओं के खातों में प्रतिव्यक्ति 10,000 रुपये भेजे। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थी महिलाओं के खातों में पहुंचाई गई। कुल मिलाकर 2,500 करोड़ रुपये का यह भुगतान महिलाओं को उनके स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए किया गया। मुख्यमंत्री आवास के अधिकारियों ने बताया कि सीएम ने अपने आवास से यह राशि महिलाओं के खातों में ट्रांसफर कर दी।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा करना है। योजना के जरिए महिलाएं अपने छोटे व्यवसाय या उद्योग की शुरुआत कर सकती हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि महिलाओं को न केवल वित्तीय सहायता मिलती है बल्कि उनका कौशल और व्यवसायिक क्षमता भी बढ़ती है।इस योजना की शुरुआत सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। तब से अब तक 1.81 करोड़ महिलाओं को पहली किश्त के 10,000 रुपये मिल चुके हैं। इस राशि का उपयोग महिलाएं अपने स्वरोजगार या छोटे व्यवसाय की शुरुआत के लिए करती हैं, जिससे वे अपनी आजीविका के स्थायी साधन विकसित कर सकें।
दूसरी किश्त के लिए सरकार ने लाभार्थियों का ऑडिट शुरू कर दिया है। यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि पहली किश्त का सही तरीके से उपयोग किया गया है। जिन महिलाओं ने पहली किश्त का उपयोग अपने व्यवसाय को स्थापित करने में किया है, उन्हें अब अतिरिक्त दो लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी। शुरुआत में इस योजना के तहत अतिरिक्त सहायता दो लाख रुपये तक ही थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर कुल चार लाख रुपये तक कर दिया गया है। यह अतिरिक्त सहायता केवल उन महिलाओं को मिलेगी जिन्होंने पहली किश्त का सही और उत्पादक तरीके से उपयोग किया।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाना, उनके कौशल को निखारना और उन्हें समाज में सम्मान और पहचान दिलाना भी है। अधिकारियों के अनुसार, योजना का लाभ उठाने वाली महिलाओं के व्यवसाय सफलतापूर्वक चल रहे हैं और उनके जीवन स्तर में सुधार आया है।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत मिली राशि का उपयोग महिलाएं विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों में कर सकती हैं, जैसे सिलाई-कढ़ाई, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, खुदरा व्यापार या अन्य छोटे व्यवसाय। इससे न केवल महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनती हैं, बल्कि समाज में उनकी प्रतिष्ठा और पहचान भी बढ़ती है।सरकार ने यह भी कहा है कि आने वाले समय में दूसरी किश्त के माध्यम से और अधिक महिलाओं तक लाभ पहुंचाया जाएगा, ताकि बिहार की महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें और राज्य की आर्थिक प्रगति में सक्रिय योगदान कर सकें। योजना का लाभ उठाने वाली महिलाएं न केवल वित्तीय रूप से मजबूत होंगी बल्कि उनका सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण भी होगा।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो उन्हें स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक आज़ादी दिलाने के साथ-साथ उनके कौशल और आत्मनिर्भरता को भी मजबूत कर रही है। यह योजना बिहार की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है और राज्य की विकास यात्रा में उनका योगदान सुनिश्चित कर रही है।