सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ताओं को गुवाहाटी हाई कोर्ट जाने की सलाह दी। इन याचिकाओं में सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित टारगेट-शूटिंग वीडियो के आधार पर मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूछा कि सीधे सुप्रीम कोर्ट आने के बजाय हाई कोर्ट का रुख क्यों नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि हर मामले में सीधे शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाना एक चिंताजनक प्रवृत्ति बनती जा रही है और इससे हाई कोर्ट की भूमिका को कमतर आंका जाता है। पीठ ने टिप्पणी की कि सुप्रीम कोर्ट “शॉपिंग का मंच” नहीं बन सकता और न्यायिक व्यवस्था में सभी अदालतों का सम्मान जरूरी है।
वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए और स्वतंत्र जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने पर विचार करना चाहिए। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी अन्य हाई कोर्ट में भेजने का आरोप निराधार है और न्यायिक प्रशासन की संतुलित व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है। मामला उस वीडियो से जुड़ा है, जिसे लेकर विवाद पैदा हुआ और जिसकी जांच की मांग की जा रही है।
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