हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में एक मीडिया इंटरव्यू में वर्तमान राजनीतिक हालात, संसद में हुई घटनाओं और ‘वंदे मातरम’ विवाद पर अपनी स्पष्ट राय रखी। नो-कॉन्फिडेंस मोशन और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ लाए गए प्रिविलेज मोशन पर ओवैसी ने कहा कि उनसे न तो किसी ने राय ली और न ही उन्होंने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ किसी अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने प्रिविलेज मोशन को “बिना ठोस आधार वाला” बताया और कहा कि इससे कोई असर या नतीजा निकलने वाला नहीं है। उनका कहना था कि संसद में ऐसे मुद्दों पर राजनीति करना सिर्फ ध्यान भटकाने की कोशिश है।
वंदे मातरम विवाद और संविधानिक अधिकार
‘वंदे मातरम’ विवाद पर ओवैसी ने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा कि संविधान की प्रस्तावना “हम भारत के लोग” से शुरू होती है, न कि “भारत माता की जय” से। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लेख किया, जो हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या लोग राष्ट्रगान को खत्म करना चाहते हैं और मेरी धर्म की स्वतंत्रता का क्या होगा? उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए किसी प्रमाण या सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा और RSS पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस दिशा में ये संगठन देश को ले जाना चाहते हैं, उससे भारत एक धार्मिक राज्य में बदलने का खतरा है।
असम के मुख्यमंत्री और वायरल वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के एक वायरल वीडियो पर ओवैसी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह व्यवहार “नरसंहार जैसी मानसिकता” को दर्शाता है। ओवैसी ने तर्क दिया कि अगर यह वीडियो उन्होंने खुद बनाया होता, तो पूरे देश में हंगामा मच जाता। उन्होंने सवाल उठाया कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए यह उचित है कि वह ऑटो ड्राइवर से कहे कि अगर वह ‘मियां’ है तो दो रुपये कम दे? इसके अलावा उन्होंने यह भी पूछा कि यदि मुख्यमंत्री सच में ईमानदार थे, तो वीडियो बाद में क्यों डिलीट किया गया।
बाबरी मस्जिद और सत्ता के भाषण पर टिप्पणी
बाबरी मस्जिद मामले पर ओवैसी ने अपना पुराना रुख दोहराया और कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज भी गलत लगता है। उन्होंने चिंता जताई कि अब संभल, काशी, मथुरा और मध्य प्रदेश जैसे अन्य संवेदनशील मामले भी उठाए जा रहे हैं। ओवैसी ने पूर्व चीफ जस्टिस जे. एस. वर्मा का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट सर्वोच्च है, लेकिन वह भी गलतियां कर सकता है। इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर व्यंग्य किया, जिसमें कहा गया था कि कयामत कभी नहीं आएगी और बाबरी मस्जिद दोबारा नहीं बनेगी। ओवैसी ने कहा कि कम से कम उन्हें ‘कयामत’ शब्द का हिंदी विकल्प बताना चाहिए था। कुल मिलाकर, इस इंटरव्यू में ओवैसी ने सरकार और सत्तारूढ़ दल पर सवाल उठाए, संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा पर जोर दिया और सत्ता में बैठे लोगों के भाषा और आचरण पर कड़ी टिप्पणी की