पीएम मोदी का नया नारा -ग़ुलामी की मानसिकता से मुक्त भारत

Authored By: News Corridors Desk | 14 Feb 2026, 01:15 PM
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PM नरेन्द्र मोदी  के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में शासन व्यवस्था, कानून, प्रशासनिक ढांचे और राष्ट्रीय प्रतीकों में व्यापक परिवर्तन किए हैं। इन कदमों को “गुलामी की मानसिकता से मुक्ति” के अभियान का हिस्सा बताया गया है। सरकार का कहना है कि स्वतंत्रता के दशकों बाद भी यदि देश औपनिवेशिक काल के कानूनों और प्रतीकों पर निर्भर रहेगा, तो मानसिक रूप से पूर्ण स्वतंत्रता संभव नहीं होगी। इसी सोच के साथ कानूनी और संस्थागत सुधारों की प्रक्रिया शुरू की गई।

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव आपराधिक न्याय प्रणाली में किया गया। वर्ष 1860 की भारतीय दंड संहिता, 1898/1973 की दंड प्रक्रिया संहिता और 1872 का भारतीय साक्ष्य अधिनियम, जो ब्रिटिश शासनकाल में बनाए गए थे, उन्हें समाप्त कर नए भारतीय कानून लागू किए गए। इनकी जगह अब भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू हैं। सरकार के अनुसार ये नए कानून आधुनिक अपराधों, साइबर अपराध, संगठित अपराध और डिजिटल साक्ष्यों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। साथ ही, मामलों के त्वरित निपटारे और समयबद्ध न्याय प्रक्रिया पर भी जोर दिया गया है।

ब्रिटिश काल की धारा 124ए, जिसे राजद्रोह कानून के नाम से जाना जाता था, को भी समाप्त किया गया है। उसकी जगह ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं जो देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के विरुद्ध कार्यों को दंडित करने की व्यवस्था देते हैं। सरकार का तर्क है कि राजद्रोह कानून औपनिवेशिक शासन द्वारा जनता को नियंत्रित करने के उद्देश्य से बनाया गया था, इसलिए उसे हटाना मानसिक गुलामी से मुक्ति की दिशा में एक कदम है।

इसके अतिरिक्त सरकार ने 1500 से अधिक अप्रचलित और अनावश्यक कानूनों को समाप्त करने का अभियान चलाया। इन कानूनों को प्रशासनिक जटिलता और अनावश्यक कानूनी बोझ का कारण माना गया। सरकार का दावा है कि इससे शासन प्रणाली अधिक सरल और पारदर्शी बनी है।

नई दिल्ली में स्थित Central Vista पुनर्विकास परियोजना भी इसी व्यापक परिवर्तन का हिस्सा है। इस परियोजना के तहत संसद भवन, केंद्रीय सचिवालय और अन्य प्रशासनिक परिसरों का पुनर्निर्माण तथा आधुनिकीकरण किया गया है। इसका उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों को एक ही परिसर में लाना है ताकि समन्वय बेहतर हो और संसाधनों की बचत हो सके।

इसी क्रम में New Parliament House का निर्माण किया गया, जहां अब संसद की कार्यवाही होती है। पुरानी संसद भवन, जो ब्रिटिश काल में निर्मित गोलाकार संरचना है, अब “संविधान सदन” के नाम से जानी जाती है। सरकार का कहना है कि नई इमारत आधुनिक सुविधाओं और अधिक क्षमता के साथ तैयार की गई है।

ब्रिटिश सत्ता के प्रतीक माने जाने वाले Rajpath का नाम बदलकर “कर्तव्य पथ” कर दिया गया। यह कदम प्रतीकात्मक रूप से औपनिवेशिक मानसिकता से दूरी और नागरिक कर्तव्य की भावना को दर्शाने के रूप में प्रस्तुत किया गया।

रायसीना हिल्स पर स्थित North Block और South Block, जो 1931 में निर्मित हुए थे, लंबे समय तक देश के प्रमुख मंत्रालयों का केंद्र रहे। अब मंत्रालयों को नए केंद्रीय सचिवालय परिसर में स्थानांतरित करने की योजना पर कार्य चल रहा है और भविष्य में इन ऐतिहासिक भवनों को संग्रहालय के रूप में विकसित किया जा सकता है।

आजादी के बाद 1956 से 1968 के बीच बने शास्त्री भवन, उद्योग भवन, निर्माण भवन, कृषि भवन और श्रम शक्ति भवन में दशकों से विभिन्न मंत्रालय कार्यरत थे। समय के साथ ये इमारतें आधुनिक तकनीकी आवश्यकताओं और सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं रहीं। इसलिए मंत्रालयों को नए “कॉमन सेंट्रल सचिवालय” में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

रक्षा मंत्रालय के कई विभाग द्वितीय विश्व युद्ध के समय बनी अस्थायी ‘हट्स’ में संचालित हो रहे थे। इन्हें हटाकर कस्तूरबा गांधी मार्ग और अफ्रीका एवेन्यू स्थित नए रक्षा कार्यालय परिसरों में स्थानांतरित किया गया है। इन नए परिसरों में आधुनिक सुविधाएं और बेहतर कार्य व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।

इसी प्रकार Indira Gandhi National Centre for the Arts को भी नए परिसर में स्थानांतरित किया गया है, ताकि सेंट्रल विस्टा परियोजना के अंतर्गत प्रशासनिक ढांचे को व्यवस्थित किया जा सके।

समग्र रूप से “गुलामी की मानसिकता से मुक्त भारत” अभियान के तहत कानूनों में सुधार, प्रशासनिक केंद्रीकरण, इमारतों का पुनर्निर्माण और प्रतीकों में बदलाव जैसे कदम उठाए गए हैं। सरकार इसे भारत की मानसिक, संस्थागत और संरचनात्मक स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानती है। वहीं इस पर सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर विभिन्न मत भी सामने आए हैं। फिर भी यह स्पष्ट है कि यह पहल देश की प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक और दीर्घकालिक परिवर्तन का प्रयास है।