UP Politics : योगी आदित्यनाथ के बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जवाब

Authored By: News Corridors Desk | 14 Feb 2026, 04:45 PM
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यूपी विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान “हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता” पर अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि मुख्यमंत्री को यह भी पता नहीं कि वे 2015 में शंकराचार्य नहीं थे। उन्होंने तंज कसते हुए बताया कि योगी आदित्यनाथ गोरक्ष पीठ के पीठाधीश्वर जरूर हैं, लेकिन शंकराचार्य की परंपरा और व्यवस्था को समझना बेहद जरूरी है। उनका कहना था कि शंकराचार्य पद कोई राजनीतिक या पारिवारिक अधिकार नहीं है, बल्कि यह धर्म और सनातन परंपरा के नियमों के अनुसार चलता है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ को महंत की गद्दी और मुख्यमंत्री का पद व्यक्तिगत रिश्तों और राजनीतिक व्यवस्था की वजह से मिला। उन्होंने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति को शंकराचार्य कहने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी हो, उसे मुख्यमंत्री बार-बार शंकराचार्य कह रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ऐसे लोगों को आगे बढ़ाना चाहती है, जो सिर्फ हां में हां मिलाएं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यह भी दावा किया कि वर्तमान यूपी सरकार में ब्राह्मण समाज विशेष रूप से निशाने पर है।

टीवी9 डिजिटल से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्पष्ट किया कि देश की बाकी तीनों पीठों के शंकराचार्यों ने उन्हें ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य माना है और विधिवत पट्टाभिषेक किया गया है। इसलिए अब किसी और की मंजूरी या पुष्टि की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना है कि यह पद धर्म और परंपरा से जुड़ा है और इसे केवल आधिकारिक और विधिवत मान्यता के आधार पर ही स्वीकार किया जा सकता है।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज माघ मेले के दौरान उन्हें पुलिस द्वारा रोके जाने के मामले पर कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी हमला किया और 2015 में सपा सरकार के समय उनके साथ हुए लाठीचार्ज का जिक्र किया। योगी ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है और वे खुद भी कानून का पालन करते हैं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करते हैं। विधानसभा में योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि जैसे हर कोई मुख्यमंत्री या मंत्री नहीं बन सकता, वैसे ही सनातन धर्म में भी हर पद के लिए नियम और व्यवस्था होती है। यह विवाद अब केवल बयान का नहीं रह गया है, बल्कि सत्ता, धर्म और अधिकार की समझ का मामला बन गया है।