पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में एक बेहद विवादित और तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान का इस्तेमाल “टॉयलेट पेपर से भी बदतर” तरीके से किया और फिर छोड़ दिया। उनके इस बयान ने पाकिस्तान की विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आसिफ ने यह भी साफ कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ रिश्तों में अपनी राष्ट्रीय हितों की बलि दी और 9/11 के बाद खुद को “किराये पर उपलब्ध” देश बना लिया।
संसद में अपने संबोधन में ख्वाजा आसिफ ने यह स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में अमेरिका द्वारा थोपे गए “जिहाद” में हिस्सा लिया, जो उनकी राय में सबसे बड़ी भूल थी। उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में अफगान युद्ध को धार्मिक रंग देकर उसे सही ठहराना पाकिस्तान की सबसे बड़ी गलती थी। उनके मुताबिक उस समय पाकिस्तान ने जनता को गुमराह किया और जिहाद के नाम पर लड़ाई में भेजा, जबकि यह युद्ध असल में अमेरिकी हितों का हिस्सा था।
आसिफ ने यह भी कहा कि उस दौर में पाकिस्तान की शिक्षा प्रणाली तक को युद्ध की भावना से प्रभावित किया गया ताकि लोगों को यह युद्ध “सही” लगे। उन्होंने बताया कि जिहाद की विचारधारा आज भी समाज में जख्म की तरह मौजूद है और इसके प्रभाव अभी भी साफ दिखाई देते हैं। उनका कहना था कि पाकिस्तान ने खुद को ऐसे युद्धों में झोंक दिया जो उसके अपने नहीं थे और इसका नुकसान आज भी देश भुगत रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका को खुश करने के लिए अपने हितों की बलि दी और “किराये पर उपलब्ध” देश बनकर अपने अस्तित्व को जोखिम में डाल दिया। उनके अनुसार पाकिस्तान को अब यह समझना होगा कि दूसरों के युद्ध में शामिल होकर देश का नुकसान ही हुआ है। ख्वाजा आसिफ का यह बयान पाकिस्तान में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस को जन्म दे सकता है।