उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन सियासी माहौल पहले ही गरम हो गया है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने पुराने वोट बैंक को मजबूत करने और नए समीकरण बनाने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर चुकी हैं। 7 फरवरी को बसपा ने प्रदेश के सभी नेताओं और पदाधिकारियों की समीक्षा बैठक बुलाई, जिसकी अध्यक्षता खुद मायावती ने की। बैठक में संगठन की वर्तमान स्थिति, ज़मीनी स्तर पर हो रहे काम और आगामी रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मायावती का संगठनात्मक मजबूती पर जोर
बैठक में मायावती ने स्पष्ट संदेश दिया कि पार्टी को फिर से मज़बूती के साथ मैदान में उतारना है। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट से जुड़े एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के काम के कारण पार्टी के कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक कार्य प्रभावित हुए हैं। इन अधूरे कामों को जल्द पूरा करने की जिम्मेदारी अब पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं की होगी। मायावती ने साफ किया कि पार्टी के संगठन को मजबूत करने के लिए यह समीक्षा बैठक अहम थी, ताकि आने वाले समय में कोई ढील न रहे और पार्टी हर स्तर पर तैयार रहे।
विपक्ष और समाज के कमजोर वर्गों पर तीखा हमला
मायावती ने अपने भाषण में विरोधी दलों पर भी निशाना साधा और कहा कि वे बसपा को कमजोर करने के लिए लगातार साजिशें रच रहे हैं। उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों जैसे गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े, मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यकों की लगातार बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताई। साथ ही किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों, व्यापारियों और मेहनतकश लोगों की स्थिति को भी गंभीर बताया। मायावती ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य की अधिकांश सरकारें जाति और धर्म की राजनीति में उलझी हैं, जिससे समाज में नफरत और द्वेष बढ़ रहा है।
2027 चुनाव से पहले रणनीति और आगामी योजनाएं
मायावती ने कहा कि मौजूदा समय में टैरिफ और अन्य अहम मुद्दों पर संसद में ठोस चर्चा नहीं हो रही, क्योंकि राजनीतिक दल आपसी विवाद में व्यस्त हैं। इसके बाद बसपा ने संगठन को मजबूत करने के लिए लगभग 1600 टीमें बनाई हैं, जो गांव-गांव जाकर पुराने समर्थकों को जोड़ने और नए वोटरों को सक्रिय करने के काम में लगी हैं। समीक्षा बैठक में इन टीमों की रिपोर्ट ली गई और एसआईआर से जुड़े कामों की जानकारी भी हासिल की गई। कुल मिलाकर, 2027 के चुनाव से पहले बसपा संगठन को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत कर पुराने जनाधार को फिर से जोड़ने की तैयारी में है।