दिल्ली:- आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद के सदन में खाने में मिलावट के बढ़ते मामलों को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की। उन्होंने इसे देश में फैलता हुआ एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बताया। राघव चड्ढा ने अपने भाषण का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए कहा कि देश की जनता अनजाने में ज़हर जैसे पदार्थों का सेवन कर रही है। उनके मुताबिक, यह मुद्दा सीधे आम लोगों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है।
रोज़मर्रा के खाने में खतरनाक मिलावट का दावा
अपने भाषण के दौरान राघव चड्ढा ने कहा कि बाजार में उपलब्ध कई खाद्य उत्पाद, जो शुद्ध होने का दावा करते हैं, वास्तव में मिलावटी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दूध में यूरिया और डिटर्जेंट, सब्ज़ियों में ऑक्सीटोसिन, पनीर में कास्टिक सोडा और स्टार्च, मसालों में ईंट का चूरा, शहद में शुगर सिरप व रंग, आइसक्रीम में डिटर्जेंट पाउडर और पोल्ट्री उत्पादों में स्टेरॉयड का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही पैकेज्ड फूड में हानिकारक केमिकल्स और भ्रामक स्वास्थ्य दावे किए जा रहे हैं।
बच्चों और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर असर
राघव चड्ढा ने कहा कि खाने में मिलावट का सबसे ज़्यादा असर बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब एक मां अपने बच्चे को पोषण देने के लिए दूध देती है, तो उसे यह अंदाज़ा नहीं होता कि वह अनजाने में उसे यूरिया या डिटर्जेंट जैसे रसायन भी पिला रही है। उन्होंने शोध का हवाला देते हुए बताया कि बड़ी संख्या में दूध और सब्ज़ियों के सैंपल्स मिलावटी पाए गए हैं, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
विदेशों में प्रतिबंधित, भारत में खुलेआम बिक्री
राघव चड्ढा ने यह भी आरोप लगाया कि कई ऐसे खाद्य उत्पाद भारत में बिक रहे हैं, जिन्हें अन्य देशों में स्वास्थ्य कारणों से प्रतिबंधित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि कुछ प्रमुख मसाला कंपनियों के उत्पाद अमेरिका और ब्रिटेन में बैन हुए, लेकिन वही सामान भारत में उपभोक्ताओं को बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हालात यह हैं कि जिन खाद्य वस्तुओं को दूसरे देशों में जानवरों को भी नहीं खिलाया जाता, वे भारत में लोगों को खाने के लिए उपलब्ध हैं। अंत में उन्होंने FSSAI को सशक्त बनाने, जांच व्यवस्था मजबूत करने और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की।