इस्लामाबाद में शुक्रवार को हुई शिया मस्जिद पर आत्मघाती हमले ने पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हिला कर रख दिया। इस हमले में कम से कम 70 लोग मारे गए और 169 अन्य घायल हो गए। इस घटना ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों की कमज़ोरी को उजागर किया है, क्योंकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुरुआती आरोप भारत पर लगाए थे, लेकिन अब खुद पाकिस्तानी जांच एजेंसियों ने हमला करने वाले 3 लोगों की गिरफ्तारी की है। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया कि हमला स्थानीय नेटवर्क और आतंकी संगठन के लिंक के साथ हुआ था, और पाकिस्तान की सरकार पहले से लगाए गए आरोपों में गलत साबित हुई है।
पाकिस्तान पुलिस ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के पेशावर में दो पुरुष और एक महिला को गिरफ्तार किया है, जिनका इस्लामाबाद में शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले से सीधा संबंध पाया गया है। जांच में सामने आया कि हमलावर यासिर था, जिसकी पहचान उसके पास से मिले पहचान पत्र से हुई। यासिर का स्थायी पता अब्बास कॉलोनी, शिरो जंगी, चारसद्दा रोड, पेशावर था, जबकि अस्थायी निवास गंज मोहल्ला काजियान, पेशावर में था। अधिकारियों ने बताया कि यासिर के भाइयों और महिला के माध्यम से हमले के पीछे सक्रिय नेटवर्क और संभावित सुविधा प्रदान करने वालों की पहचान की जा रही है।
जांच एजेंसियों ने खुलासा किया है कि यासिर हमले से पहले लगभग पांच महीने अफगानिस्तान में था, जहां उसने हथियार चलाने और आत्मघाती हमलों की ट्रेनिंग ली। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खुरासान प्रांत (IS-K) ने ली है। यह हमला पाकिस्तान में शिया समुदाय पर हुए सबसे भयानक हमलों में से एक है और 2008 के मार्केट होटल बम विस्फोट के बाद इस्लामाबाद में सबसे घातक साबित हुआ। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान से लिंक का दावा किया, जबकि तालिबान ने इसे खारिज किया।
हमले के बाद पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां हमले के पूरे नेटवर्क को नष्ट करने और संदिग्धों की पहचान करने में लगी हैं। पेशावर और अन्य इलाकों में छापेमारी जारी है ताकि हमले के संभावित योजनाकार और सहयोगियों को पकड़ा जा सके। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने इस हमले की निंदा की है। इस घटना ने पाकिस्तान की सुरक्षा और आतंकी नियंत्रण के मुद्दों को फिर से उजागर किया है और दिखाया कि पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा ढांचे में बड़ी कमज़ोरियां मौजूद हैं।