जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने रावलपिंडी में एक सभा के दौरान पाकिस्तान की अफगान नीति और विदेश नीति पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि दशकों से यह समझ नहीं आया कि हमारी नीति इतनी असफल क्यों हुई। मज़ाक करते हुए उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से एक भी फल पाकिस्तान में नहीं आता, लेकिन आतंकवादी आसानी से सीमा पार कर रहे हैं। उन्होंने सेना से सवाल किया कि अगर आतंकवादी आ रहे हैं तो उन्हें क्यों नहीं रोका जाता, जबकि अफगान सरकार कभी आपत्ति नहीं जताती।
विदेश और आर्थिक नीतियों को बताया असफल
मौलाना रहमान ने पाकिस्तान की विदेश और आर्थिक नीतियों को पूरी तरह नाकाम करार दिया। उनका कहना था कि भारत और अफगानिस्तान दुश्मन बने हुए हैं, जबकि ईरान और चीन जैसे मित्र नाराज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेश नीति सेना तय करती है, चुनी हुई सरकार नहीं, और इसी कारण देश में असुरक्षा और अविश्वास फैला है।
चीन और सीपीईसी पर सवाल
रहमान ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चीन अब पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करता। इमरान खान के समय प्रोजेक्ट रुकने की शिकायतें थीं, लेकिन मौजूदा सरकार में भी कोई प्रगति नहीं हुई। उनकी राय में चीन उम्मीद करता था कि मौजूदा सरकार संबंधों को सुधारेंगी, लेकिन अब भरोसे की कमी के कारण विकास प्रोजेक्ट ठप हैं।
इस्लामाबाद हमले पर अफगानिस्तान ने किया इनकार
पिछले शुक्रवार इस्लामाबाद की मस्जिद में हुए आत्मघाती हमले में 69 लोग मारे गए और 170 से ज्यादा घायल हुए। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बिना जांच अफगानिस्तान पर आरोप लगाया था। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और बेबुनियाद बताया और कहा कि वे अपनी सुरक्षा विफलताओं को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।