बिहार की राजनीति में विरासत और नेतृत्व को लेकर चर्चा नई बात नहीं है। इस बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर अटकलें तेज हैं। हाल ही में उनका गया दौरा काफी चर्चा में रहा। बिना किसी औपचारिक राजनीतिक घोषणा के उन्होंने सरकारी योजनाओं की समीक्षा की, स्थानीय लोगों से मुलाकात की और सामाजिक व धार्मिक स्थलों पर जाकर श्रद्धाव्यक्त की। इस दौरे को सामान्य यात्रा से ज्यादा राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है।
हालांकि अब तक न तो नीतीश कुमार और न ही निशांत कुमार ने राजनीति में आने को लेकर कोई स्पष्ट बयान दिया है। न उन्होंने प्रवेश की घोषणा की है और न ही इससे इनकार किया है। फिर भी, राजनीतिक जानकार मानते हैं कि गया का दौरा एक सोची-समझी सक्रियता का हिस्सा हो सकता है। विकास कार्यों की जानकारी लेना, समाज के अलग-अलग वर्गों से मिलना और धार्मिक स्थलों पर जाना—इन सबको एक संभावित सार्वजनिक भूमिका की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल स्थिति साफ नहीं है कि यह सक्रियता आगे चलकर औपचारिक राजनीतिक जिम्मेदारी में बदलेगी या केवल जनसंपर्क तक सीमित रहेगी। बिहार की राजनीति में संकेत अक्सर सीधे शब्दों से ज्यादा मायने रखते हैं। ऐसे में आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा कि निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में कदम रखते हैं या नहीं।