UGC New Rules Controversy : दिग्विजय सिंह की सिफारिश पर छात्रों और नेताओं में बहस, सवर्ण समाज में नाराजगी

Authored By: News Corridors Desk | 27 Jan 2026, 05:55 PM
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UGC नए नियमों पर देशभर में विवाद: छात्र और नेता दो धड़ों में बंटे

जनवरी 2026 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी किए गए नए ‘एंटी‑डिस्क्रिमिनेशन’ नियमों को लेकर पूरे देश में गर्मागर्म बहस छिड़ गई है। नियमों के अनुसार अब SC, ST और OBC छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को गंभीरता से लिया जाएगा और उनके लिए उच्च शिक्षा संस्थानों में विशेष सुरक्षा और शिकायत निवारण की व्यवस्था की जाएगी। वहीं, सवर्ण समाज (जनरल कैटेगरी) के कुछ हिस्सों में इन नियमों के खिलाफ तीव्र विरोध देखा जा रहा है। छात्र और विभिन्न छात्र संगठन विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर भी जमकर विरोध और बहस चल रही है। विरोध के पीछे मुख्य चिंता यह है कि नई गाइडलाइन के तहत जनरल कैटेगरी के छात्रों को बिना किसी दोष के पीड़ित दिखा दिया जा सकता है और उन्हें झूठी शिकायत का डर सताने लगे।

कौन कर रहा है नए नियमों का समर्थन?

उत्तर प्रदेश में इस विवाद के बीच कुछ नेताओं ने नए नियमों का समर्थन किया है। आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और नगीना से सांसद चन्द्र शेखर आजाद, पूर्व मंत्री और विधायक स्वामी प्रसाद मौर्या, और निषाद पार्टी के नेता व उत्तर प्रदेश के मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद ने नए UGC नियमों को उच्च शिक्षा में पिछड़े वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाला कदम बताया है। इन नेताओं का कहना है कि नियम केवल भेदभाव को रोकने के लिए हैं और SC, ST, OBC छात्रों के अधिकारों और सुरक्षित वातावरण को सुनिश्चित करते हैं। उनके अनुसार, यह कदम शिक्षा संस्थानों में समानता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

दिग्विजय सिंह की संसदीय समिति और सिफारिशें

संसदीय समिति की रिपोर्ट और नियमों की नींव मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह द्वारा दिसंबर 2025 में तैयार की गई थी। समिति ने प्रारंभिक ड्राफ्ट में शामिल नहीं किए गए OBC छात्रों को भी जाति-आधारित भेदभाव के दायरे में लाने की सिफारिश की। समिति के सुझावों के अनुसार उच्च शिक्षा संस्थानों में पिछड़े वर्गों के साथ होने वाले भेदभाव को SC-ST की तरह गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इसी आधार पर UGC ने अंतिम नियमों में OBC छात्रों को भी शामिल किया और संस्थानों में इक्विटी कमेटियों के गठन के लिए नए दिशा-निर्देश बनाए। यह कदम सुनिश्चित करता है कि वंचित वर्गों की शिकायतों को निष्पक्ष तरीके से सुना और निपटारा किया जाए।

इक्विटी कमेटी, झूठी शिकायत और सवर्ण समाज की चिंताएं

संसदीय समिति ने सुझाव दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में बनने वाली इक्विटी कमेटी में SC, ST और OBC वर्ग के प्रतिनिधियों की संख्या कम से कम 50% हो। जनरल कैटेगरी के छात्रों का इसमें प्रतिनिधित्व न होने को लेकर विरोध हुआ है, क्योंकि उन्हें डर है कि बिना दोषी हुए उन्हें पीड़ित माना जा सकता है। इसके अलावा, प्रारंभिक ड्राफ्ट में झूठी शिकायत पर जुर्माने का प्रावधान था, जिसे समिति ने हटाने की सिफारिश की। इसका उद्देश्य यह था कि पीड़ित छात्र बिना डर के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। जनवरी 2026 में फाइनल नियमों में जुर्माने का प्रावधान पूरी तरह हटा दिया गया, जिससे कुछ सवर्ण छात्रों को यह डर है कि उन्हें असल में दोषी न होने पर भी परेशान किया जा सकता है।

दिग्विजय सिंह की भूमिका और राजनीतिक प्रभाव

दिग्विजय सिंह, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संसदीय समिति के अध्यक्ष हैं, इस विवाद के केंद्र में हैं। उनकी अध्यक्षता वाली समिति ने उच्च शिक्षा में भेदभाव रोकने और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सिफारिशें कीं। इन सिफारिशों के बाद ही UGC ने नियमों को अंतिम रूप दिया। इस कदम के बाद सवर्ण समाज और राजनीतिक गलियारों में विरोध बढ़ गया है। विपक्ष इसे नियमों में नई चालाकी मान रहा है, जबकि समर्थक इसे पिछड़े वर्गों के लिए न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाला सकारात्मक कदम बता रहे हैं। इस पूरे मामले ने शिक्षा क्षेत्र में बहस को फिर से तूल दिया है और सामाजिक न्याय तथा समानता के मुद्दों पर चर्चा को बढ़ावा दिया है।