तेजस्वी यादव की विदेश यात्रा और पार्टी में उठ रही असहमति
तेजस्वी यादव के यूरोप दौरे से लौटने पर किसी भी सांसद या विधायक ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत नहीं किया, जो आरजेडी के अंदर उठ रहे सवालों और असहमति की एक झलक माना गया। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजद की करारी हार के बाद पार्टी केवल 25 सीटों पर सिमट गई थी। इस हार के लिए तेजस्वी और उनके बेहद करीबी संजय यादव को जिम्मेदार ठहराया गया। परिणामस्वरूप पार्टी के अंदर से तीखी आलोचनाएँ उठीं और तेजस्वी को अपनी राजनीतिक रणनीति और अपने करीबी नेताओं से दूरी पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया गया।
पार्टी के भीतर नई रणनीति और सार्वजनिक मंच पर दूरी
हार के बाद तेजस्वी यादव ने सार्वजनिक मंच पर संजय यादव से दूरी बनाए रखने का निर्णय लिया। शुक्रवार को उनके सरकारी आवास पर हुई पार्टी की बैठक में यह साफ दिखाई दिया। तेजस्वी के सबसे नजदीक उनकी बहन और पाटलिपुत्र से सांसद मीसा भारती बैठीं, जबकि राज्यसभा सांसद संजय यादव सबसे दूर बैठे। इस बैठक को तेजस्वी द्वारा अपने करीबी नेताओं और परिवार के बीच सामंजस्य और दूरी की रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य विरोधियों और पार्टी के भीतर से उठ रही आलोचना दोनों से बचना है।
जमीनी मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति
तेजस्वी यादव ने पार्टी के विधायकों और विधानसभा चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों को उनके क्षेत्र के मुद्दों की सूची तैयार करने का टास्क दिया है। इसके जरिए सरकार की नाकामियों को जनता के सामने लाया जाएगा। बजट सत्र में तेजस्वी सरकार के खिलाफ आंगनबाड़ी केंद्रों की खराब स्थिति, उप स्वास्थ्य केंद्रों की जर्जर हालत, सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे। साथ ही, उन्होंने नीतीश सरकार से हर चुनावी वादे पर जवाबदेही मांगी है, जैसे कि युवाओं को नौकरी, महिलाओं को जीविका के लिए वित्तीय सहायता और जिले में कारखाने स्थापित करने के वादे।
संसद में NDA सरकार को घेरने की तैयारी
तेजस्वी यादव की रणनीति केवल बिहार तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपनी पार्टी के सांसदों को बिहार के मुद्दों पर केंद्र सरकार को चुनौती देने का टास्क दिया है। इसमें बिहार को विशेष राज्य का दर्जा, विशेष पैकेज की स्थिति और केंद्रीय योजनाओं में राज्य की हिस्सेदारी जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा, अगर संसद में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ जैसे बिल पेश किए जाते हैं, तो उसका विरोध कैसे किया जाएगा, इसकी रणनीति भी तैयार की गई है।
पार्टी के भीतर कार्रवाई और बजट सत्र की तैयारी
तेजस्वी यादव ने चुनाव में पार्टी के खिलाफ काम करने वाले भीतरघातियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाने का भी निर्णय लिया है। करीब 400 नेताओं की सूची बनाई गई है, जिन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप हैं। जांच के बाद ठोस सबूत मिलने पर इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यूरोप यात्रा से लौटने के बाद तेजस्वी ने बजट सत्र में सरकार को केवल 74 दिन बाद कठघरे में खड़ा करने और अपनी रणनीति के अनुसार नाकामियों को उजागर करने का फैसला किया है। पटना एयरपोर्ट की खामोशी से लेकर विधानसभा और संसद के शोर तक, तेजस्वी अब भावनाओं की राजनीति नहीं, बल्कि रणनीति की राजनीति खेल रहे हैं।