शशि थरूर की कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात
कांग्रेस हाईकमान में कुछ कथित मतभेदों की खबरों के बीच, शशि थरूर ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से अहम बैठक की। यह मुलाकात संसद भवन में खरगे के कार्यालय में हुई। इस मुलाकात की समय-सारिणी महत्वपूर्ण इसलिए मानी जा रही थी क्योंकि थरूर ने हाल ही में केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए बुलाए गए अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) की एक अहम बैठक में हिस्सा नहीं लिया था। थरूर ने पहले ही पार्टी नेतृत्व को बताया था कि वे उक्त बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे क्योंकि उनका पहले से ही केरल लिटरेचर फेस्टिवल में जाना तय था। यह कदम मीडिया में उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद के रूप में उभरा था, लेकिन थरूर ने इसे केवल व्यस्तता का मामला बताया।
मुलाकात के बाद थरूर का बयान
बैठक के बाद थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दोनों नेताओं के साथ बैठक की तस्वीर साझा की और लिखा कि उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर गर्मजोशी और सार्थक चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सभी भारत के लोगों की सेवा में एक ही पेज पर हैं। थरूर ने केरल के मुख्यमंत्री पद से जुड़े सवाल पर कहा कि इस बारे में कभी कोई चर्चा नहीं हुई और वे किसी भी पद के लिए उम्मीदवार बनने में कोई रुचि नहीं रखते। उन्होंने यह भी कहा कि उनका प्राथमिक ध्यान अपने निर्वाचन क्षेत्र तिरुवनंतपुरम के मतदाताओं के हितों की रक्षा पर है और संसद में उनका कर्तव्य यही है।
पार्टी के साथ कुछ मुद्दों का संकेत
थरूर ने केरल लिटरेचर फेस्टिवल में अपनी नई किताब 'श्री नारायण गुरु' पर बात की। इसके पहले, 24 जनवरी को उन्होंने संकेत दिया था कि उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच कुछ मुद्दे हैं, जिन्हें वे व्यक्तिगत रूप से बातचीत के माध्यम से सुलझाना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह मसला सार्वजनिक रूप से चर्चा का विषय नहीं होना चाहिए। थरूर ने मीडिया में आई खबरों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ रिपोर्टें सही हो सकती हैं और कुछ नहीं, लेकिन ऐसी बातें सार्वजनिक मंच पर चर्चा के लिए नहीं हैं। यह संकेत उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच बेहतर संवाद की आवश्यकता को दर्शाता है।
राहुल गांधी द्वारा नजरअंदाज किए जाने का मामला
थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद की खबरें तब और तेज़ हुईं जब केरल के कोच्चि में 19 जनवरी को पार्टी की महापंचायत में राहुल गांधी ने उन्हें सीधे अभिवादन नहीं किया। इस दौरान राहुल गांधी ने कई अन्य नेताओं का अभिवादन किया, लेकिन थरूर को नजरअंदाज किया। थरूर ने इसे व्यक्तिगत रूप से अपमानजनक महसूस किया। मीडिया में यह घटना दोनों के बीच दूरी और मतभेद के रूप में पेश की गई। हालांकि थरूर ने इस पर सीधे विवाद खड़ा नहीं किया और इसे एक व्यक्तिगत अनुभव के रूप में ही रखा, जिससे संकेत मिलता है कि वे पार्टी के भीतर बातचीत और समाधान के पक्षधर हैं।