उत्तर प्रदेश की राजनीति में रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का अपना एक अलग प्रभाव है. जिसे अक्सर 'ठाकुर राजनीति' की धुरी माना जाता है। उनके खेमे या करीबियों में कई प्रमुख ठाकुर विधायक और बाहुबली नेता शामिल है । राजा भइया इनके बीच होने वाले किसी तरह के विवाद या मनमुटाव को पंचायत के जरिेए सुलझाने का काम करते है...जिससे ठाकुर कुनबा मजबूत बना रहे | हाल ही में राजा भइया ने 'कुटुंब परिवार' बैठक का नेतृत्व किया यह बैठक लखनऊ में आयोजित की गई थी । लखनऊ में हुई इस बैठक में करीब 40 राजपूत विधायकों ने हिस्सा लिया था, जिसमें एक दूसरे के धुर विरोधी धनंजय सिंह और गोसाईगंज से विधायक रहे अभय सिंह भी शामिल थे । जिसका नेतृत्व परोक्ष रूप से राजा भैया के हाथों में देखा गया |
आप को इन विधायकों की क्राइम कुडली भी जाननी चाहिए क्यों इन्हें बाहुबली कहा जाता है ।
रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) : स्वयं कुंडा विधानसभा सीट से विधायक हैं।राजा भैया 1993 से लगातार कुंडा से निर्दलीय विधायक रहे। उन्होंने 2018 में अपनी पार्टी जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) बनाई। वे यूपी सरकार में कई बार कैबिनेट मंत्री (खाद्य एवं रसद, जेल विभाग) भी रह चुके हैं। चुनावी हलफनामों और पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, राजा भैया पर अलग-अलग समय में 47 से ज्यादा मुकदमे दर्ज रहे हैं। इनमें हत्या, अपहरण, और डकैती जैसे गंभीर मामले शामिल थे। हालांकि, कई मामलों में वे बरी हो चुके हैं या क्लोजर रिपोर्ट लग चुकी है। उन पर पोटा (POTA) और गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया था।
अक्षय प्रताप सिंह (गोपाल जी): ये राजा भैया के सबसे करीबी रिश्तेदार और 'परछाई' माने जाते हैं। ये एमएलसी (MLC) हैं और राजा भैया के हर राजनीतिक निर्णय में साथ रहते हैं।उन पर 25 से अधिक मुकदमे दर्ज रहे हैं। 2022 में उन्हें फर्जी पते पर रिवॉल्वर का लाइसेंस लेने के मामले में 7 साल की सजा भी सुनाई गई थी, जिसके कारण उनकी सदस्यता पर संकट आया था।
अभय सिंह: अयोध्या की गोसाईगंज सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक हैं, लेकिन हाल के समय में इनकी नजदीकियां राजा भैया और भाजपा खेमे से बढ़ी हैं। इन्हें पूर्वांचल का कद्दावर ठाकुर नेता माना जाता है।अभय सिंह पर हत्या, हत्या के प्रयास और जबरन वसूली जैसे 30 से अधिक मुकदमे दर्ज रहे हैं। उनके हलफनामे के अनुसार वर्तमान में करीब 10 गंभीर मामले विचाराधीन हैं।
राकेश प्रताप सिंह: अमेठी की गौरीगंज सीट से सपा विधायक हैं। ये भी राजा भैया के साथ अक्सर विभिन्न मंचों और बैठकों में देखे जाते हैं।2022 के हलफनामे के अनुसार उन पर 4-5 मुकदमे दर्ज थे। हाल ही में उन पर पुलिस थाने में मारपीट का मामला भी दर्ज हुआ था। धनंजय सिंह: जौनपुर के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता। हालांकि ये अलग दल से जुड़े रहे हैं, लेकिन राजा भैया के साथ इनके व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंध काफी गहरे रहे हैं।चुनावी हलफनामों के अनुसार, धनंजय सिंह पर उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन के दौरान कुल 41 से 43 मुकदमे दर्ज रहे हैं।
2024-25 तक के आंकड़ों के अनुसार, उनके खिलाफ अब लगभग 10 मुकदमे लंबित (pending) हैं। बाकी मामलों में या तो वे बरी हो चुके हैं, या साक्ष्यों के अभाव में केस खत्म हो गए हैं।
वही मार्च 2024 में, उन्हें जौनपुर की एक अदालत ने अपहरण और रंगदारी के एक मामले (नमामि गंगे प्रोजेक्ट के मैनेजर से जुड़ा मामला) में 7 साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, बाद में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी।
दिसंबर 2025: ताजा जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 के अंत में लखनऊ की स्वास्तिका सोसाइटी में जमीन कब्जाने, जान से मारने की धमकी देने और एससी/एसटी एक्ट के तहत उन पर और उनके करीबियों पर एक नया मुकदमा दर्ज किया गया है।
गैंगस्टर एक्ट: धनंजय सिंह पर करियर के दौरान करीब 4 बार गैंगस्टर एक्ट लगाया गया।
नदेसर शूटआउट (वाराणसी): 2002 के इस प्रसिद्ध मामले में हाल ही में (दिसंबर 2025) इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी एक याचिका खारिज कर दी। यह मामला उन पर हुए जानलेवा हमले से जुड़ा था।
शैलेंद्र प्रताप सिंह (एमएलसी)आप को बताते चले कि धनजंय और अभय के बीच चल रहे विवाद की वजह से कुटुम्ब परिवार में चिन्ता देखी गई है यही कारण है कि खुद राजा भइया ने कम्हान सम्हाल ली है कि वह अभय और धनंजय के बीच विवाद सुलझा देगे ऐसा हो भी क्यों ना उन्हें जो कुटुम्ब को मजबूत जो बनाना है ।2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा का चुनाव होना है ।