चिकन 840 और चावल 320 रुपये किलो: पाकिस्तान में लगातार 23वें हफ्ते बढ़ी महंगाई

Authored By: News Corridors Desk | 12 Jan 2026, 05:39 PM
news-banner

आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में महंगाई लगातार 23वें हफ्ते बढ़ी है। चिकन, चावल, गेहूं, चीनी और गैस की कीमतों में तेज उछाल से आम जनता की थाली प्रभावित हो रही है।
पाकिस्तान में महंगाई का संकट लगातार गहराता जा रहा है। वर्ल्ड बैंक और मित्र देशों से मिली आर्थिक मदद के बावजूद पाकिस्तान में हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। आम जनता पर महंगाई की मार लगातार बढ़ती जा रही है और साप्ताहिक महंगाई दर में लगातार 23वें हफ्ते बढ़ोतरी दर्ज की गई है।


महंगाई का असर आम लोगों की थाली पर साफ दिख रहा है। चिकन और चावल जैसे बुनियादी खाद्य पदार्थ भी आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में एक किलो चिकन करीब 840 पाकिस्तानी रुपये, जबकि चावल 320 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। दूध, अंडे, सब्जियां और फल भी महंगे हो चुके हैं। पाकिस्तान में पिछले 6 महीनों (जुलाई 2025 से दिसंबर 2025/जनवरी 2026) के दौरान खाद्य पदार्थों की कीमतों में काफी अस्थिरता देखी गई है। साल 2025 के अंत तक आते-आते दालों, गोश्त और कुछ सब्जियों के दामों में भारी उछाल आया है, जबकि चावल और चीनी जैसी चीजों में मामूली राहत या स्थिरता भी देखी गई।


पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (PBS) और हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर विवरण नीचे दिया गया है:

सप्लाई चैन में बाधा: अफगानिस्तान बॉर्डर बंद होने और हालिया बाढ़ के बाद परिवहन प्रभावित होने से सब्जियों और फलों के दाम अचानक बढ़ गए।
* महंगाई दर (Inflation): अक्टूबर और नवंबर 2025 में महंगाई दर फिर से बढ़कर 6.2% से 7% के बीच पहुँच गई, जिसने खाने-पीने की चीजों को महंगा कर दिया।
* बिजली और गैस के दाम: ऊर्जा की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन और कोल्ड स्टोरेज पर पड़ा, जिससे अंततः ग्राहकों के लिए सामान महंगा हो गया।
ताजा स्थिति (दिसंबर 2025 - जनवरी 2026)
दिसंबर 2025 के अंत में एक "महंगाई का तूफान" देखा गया जहाँ एक ही महीने में प्याज के दाम 47% और चिकन के दाम 17% तक बढ़ गए। हालांकि, इस बीच टमाटर और कुछ मौसमी सब्जियों की कीमतों में दिसंबर के अंत में मामूली गिरावट भी दर्ज की गई है।पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में खाद्य पदार्थों के दामों में अंतर वहां की सप्लाई चेन, स्थानीय उत्पादन और परिवहन लागत (Transportation cost) पर निर्भर करता है।

वर्तमान आंकड़ों (जनवरी 2026) के अनुसार, पाकिस्तान के तीन सबसे बड़े शहरों में स्थिति इस प्रकार है:
1. कराची (Karachi)
कराची में आमतौर पर आयातित सामान (Imported items) थोड़े सस्ते होते हैं, लेकिन सब्जियां और डेयरी उत्पाद पंजाब के शहरों की तुलना में महंगे हो जाते हैं।
* चिकन: यहाँ चिकन के दाम देश में सबसे अधिक रहते हैं, फिलहाल ₹640 - ₹680 प्रति किलो के बीच हैं।
* सब्जियां: प्याज और टमाटर की कीमतें यहाँ अक्सर ₹220-₹250 के पार चली जाती हैं।
* दालें: दाल माश और चना दाल यहाँ ₹500 - ₹550 के आसपास बिक रही हैं।
2. लाहौर (Lahore)
लाहौर कृषि प्रधान पंजाब क्षेत्र के केंद्र में होने के कारण सब्जियों और अनाज के मामले में कराची से थोड़ा सस्ता रहता है।
* आटा और चावल: बासमती चावल और आटे की कीमतें यहाँ ₹280 - ₹350 प्रति किलो (चावल) के बीच हैं।
* गोश्त: मटन के दाम लाहौर में बहुत ऊंचे हैं, जो ₹2,200 से ₹2,500 प्रति किलो तक पहुँच गए हैं।
* घी/तेल: यहाँ ब्रांडेड घी की कीमत ₹520 - ₹540 प्रति किलो के आसपास है।
3. इस्लामाबाद/रावतपिंडी (Islamabad/Rawalpindi)
यह क्षेत्र सबसे महंगा माना जाता है क्योंकि यहाँ अधिकांश चीजें दूसरे राज्यों से आती हैं।
* सब्जियां: इस्लामाबाद में सब्जियों के दाम लाहौर के मुकाबले 15-20% अधिक होते हैं।
* दूध और दही: यहाँ खुला दूध ₹220 - ₹240 प्रति लीटर तक बिक रहा है।
* चिकन: यहाँ भी चिकन की कीमतें ₹620 - ₹650 के आसपास स्थिर हैं।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 8 जनवरी को समाप्त सप्ताह में संवेदनशील मूल्य सूचकांक (SPI) के आधार पर महंगाई दर सालाना 3.20 प्रतिशत बढ़ी है। गेहूं का आटा, चावल, चीनी, चिकन और अन्य जरूरी खाद्य पदार्थों की खुदरा कीमतों में उछाल इसका मुख्य कारण है। यह सिलसिला बीते 23 हफ्तों से बिना रुके जारी है।
सालाना आधार पर कीमतों में और भी बड़ा उछाल देखने को मिला है। गेहूं का आटा 31.12 प्रतिशत, गैस कीमतें 29.85 प्रतिशत, मिर्च पाउडर 11.43 प्रतिशत, चीनी 11.18 प्रतिशत और केले व जलाऊ लकड़ी 10 प्रतिशत से अधिक महंगे हो चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एक ही सप्ताह में 21 जरूरी वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई, जबकि 22 वस्तुओं के दाम स्थिर रहे। पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई ने जनता की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहद मुश्किल बना दिया है। आर्थिक संकट से उबरने के तमाम प्रयासों के बावजूद हालात फिलहाल सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं।