क्या है निपाह वायरस, जिसने भारत के बाद अब चीन में भी मचाया हड़कंप

Authored By: News Corridors Desk | 31 Jan 2026, 01:58 PM
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चीन में निपाह वायरस को लेकर सतर्कता बढ़ी

भारत में निपाह वायरस के प्रकोप के बाद अब चीन में भी स्वास्थ्य अधिकारियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। बीजिंग और अन्य बड़े एयरपोर्ट्स पर उन क्षेत्रों से आने वाली उड़ानों पर यात्रियों की कड़ी स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है, जिनमें निपाह वायरस के प्रकोप की रिपोर्ट हुई है। इसमें भारत भी शामिल है। कुछ भारतीय यात्रियों ने बताया कि एयरपोर्ट पर उनकी जांच के लिए स्वाब टेस्ट किए जा रहे थे। हालांकि, चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब तक चीन में निपाह वायरस का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। इस कदम से यह संकेत मिलता है कि एशियाई देशों में स्वास्थ्य निगरानी और महामारी नियंत्रण को लेकर गंभीरता बरती जा रही है।

निपाह वायरस कैसे फैलता है और जोखिम

निपाह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों, संक्रमित व्यक्तियों या दूषित वस्तुओं के सीधे संपर्क से फैलता है। यह वायरस पर्यावरण में लंबे समय तक जीवित नहीं रह पाता, इसलिए सामान्य जनता के लिए संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत कम माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस बार-बार प्रकोप की क्षमता रखता है और इसकी मृत्यु दर काफी अधिक है। शेन्ज़ेन के थर्ड पीपुल्स हॉस्पिटल के प्रमुख लू होंग्झौ ने बताया कि वायरस के कारण गंभीर श्वसन और तंत्रिका संबंधी रोग हो सकते हैं, इसलिए उच्च सतर्कता और समय पर निदान बेहद जरूरी है।

निपाह वायरस के लक्षण और भारत में स्थिति

निपाह वायरस मुख्य रूप से श्वसन तंत्र और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। संक्रमित व्यक्ति में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी और चेतना में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। लक्षण आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति से संपर्क के 3 से 14 दिनों के भीतर प्रकट होते हैं। भारत में अब तक केवल दो पुष्ट मामले सामने आए हैं, जो दिसंबर 2025 में पश्चिम बंगाल से रिपोर्ट किए गए थे। किसी बड़े प्रकोप की स्थिति नहीं है। इसके बावजूद चीन, थाईलैंड, नेपाल, मलेशिया और सिंगापुर जैसे कई एशियाई देशों ने हवाई अड्डों पर यात्रियों की जांच बढ़ा दी है ताकि संक्रमण को नियंत्रित किया जा सके।

निपाह वायरस का इतिहास और स्रोत

निपाह वायरस (Nipah virus – NiV) एक जूनोटिक वायरस है, जो मुख्य रूप से फ्रूट बैट्स/चमगादड़ से मनुष्यों में फैलता है। यह Paramyxoviridae परिवार का हिस्सा है और Henipavirus जीनस में आता है। पहली बार यह वायरस 1998-1999 में मलेशिया में सूअरों के माध्यम से पहचाना गया था, जिसके बाद इंसानों में संक्रमण के मामले भी सामने आए। विशेषज्ञों का कहना है कि निपाह वायरस के बार-बार प्रकोप और उच्च मृत्यु दर की वजह से इसे गंभीर महामारी मानकर सतर्क रहना बेहद जरूरी है।