उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया चुनावी विवाद
देश के कई राज्यों में आगामी चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान इस्तेमाल होने वाले फॉर्म सेवन के कथित दुरुपयोग को लेकर कड़ा विरोध जताया है। विपक्ष का कहना है कि इस प्रक्रिया से लोकतंत्र को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है और कुछ समुदायों के मतदान अधिकार प्रभावित किए जा रहे हैं।
क्या है फॉर्म सेवन और इसका कानूनी उद्देश्य
फॉर्म सेवन भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा जारी किया गया एक आधिकारिक फॉर्म है, जिसका उपयोग मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने के लिए किया जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर मतदाता की मृत्यु, डुप्लीकेट एंट्री, स्थानांतरण या अन्य वैध कारणों के आधार पर अपनाई जाती है। नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति इस फॉर्म के जरिए आपत्ति दर्ज कर सकता है, लेकिन इसके लिए आपत्तिकर्ता का नाम, पता और हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं। इसके बाद चुनाव अधिकारी जांच करते हैं और संतुष्टि के बाद ही नाम हटाया जाता है।
विपक्ष के आरोप: बड़े पैमाने पर फॉर्म सेवन का दुरुपयोग
विपक्षी दलों का आरोप है कि हाल के दिनों में फॉर्म सेवन का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। दावा किया गया है कि पहले से छपे हुए फॉर्म गांवों में बांटे जा रहे हैं और फर्जी हस्ताक्षरों के साथ बड़ी संख्या में जमा किए जा रहे हैं। कई मामलों में आपत्तिकर्ता का कोई स्पष्ट पता नहीं है, गलत ईपीआईसी नंबर और अमान्य मोबाइल नंबर दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे वास्तविक मतदाताओं को यह जानकारी तक नहीं मिल पा रही कि उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा चुका है।
अखिलेश यादव और कांग्रेस की चुनाव आयोग से मांग
अखिलेश यादव ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ एक बड़ी साजिश बताते हुए आरोप लगाया है कि फॉर्म सेवन के जरिए खासतौर पर पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने न्यायालय, निर्वाचन आयोग और मीडिया से इस मामले का संज्ञान लेने की अपील की है। वहीं कांग्रेस ने चुनाव आयोग को लिखे पत्र में इसे एक संगठित अभियान बताया है और कहा है कि कई राज्यों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं। पार्टी ने रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 का हवाला देते हुए तत्काल जांच और गलत तरीके से हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की है।