पाकिस्तान की सेना और सरकार ने हाल ही में दावा किया कि बलूचिस्तान प्रांत में हुई हिंसक घटनाओं के पीछे भारत का हाथ है। पाकिस्तान सेना के अनुसार, बलूचिस्तान में 12 अलग-अलग स्थानों पर सुरक्षा बलों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और आम नागरिकों को निशाना बनाकर हमले किए गए, जिसके बाद बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया गया। इस अभियान में 90 से अधिक उग्रवादियों के मारे जाने का दावा किया गया। पाकिस्तान ने इन हमलों को “विदेशी समर्थन प्राप्त आतंकवाद” से जोड़ते हुए सीधे तौर पर भारत पर आरोप लगाए, हालांकि इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया।
भारत का सख्त जवाब: आरोप पूरी तरह निराधार
पाकिस्तान के आरोपों पर भारत ने कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह पाकिस्तान की अपनी आंतरिक विफलताओं से ध्यान भटकाने की पुरानी और बार-बार दोहराई जाने वाली रणनीति है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जब भी पाकिस्तान के भीतर हिंसा बढ़ती है, तो वह बिना किसी प्रमाण के भारत पर आरोप मढ़ देता है। भारत ने दोहराया कि वह किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता और ऐसे आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन पर भारत का आरोप
भारत ने अपने बयान में पाकिस्तान के बलूचिस्तान में मानवाधिकार रिकॉर्ड को भी सामने रखा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान का इतिहास दमन, जबरन गुमशुदगी, सैन्य कार्रवाई और नागरिकों पर अत्याचारों से भरा रहा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी कई बार नोटिस में ले चुका है। भारत ने कहा कि बलूचिस्तान में अशांति की जड़ें स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक मांगों में हैं, जिन्हें दबाने के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल किया गया। ऐसे में बाहरी देशों पर दोष मढ़ना वास्तविक समस्याओं से बचने का तरीका है।
क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय संदेश
भारत ने पाकिस्तान से आग्रह किया कि वह निराधार आरोप लगाने के बजाय बलूचिस्तान के लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुने और मानवाधिकारों का सम्मान करे। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि दक्षिण एशिया में स्थिरता और शांति के लिए पाकिस्तान को आतंकवाद और आंतरिक असंतोष के मूल कारणों से निपटना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की छवि और उसके आंतरिक हालात को उजागर करने की रणनीति का हिस्सा है, जिससे वैश्विक समुदाय का ध्यान बलूचिस्तान में जारी हालात पर केंद्रित हो सके।