योगी जी की बनाई हिन्दू युवा वाहिनी चल रही है या फिर बन्द ? -
वैसे तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर हिन्दू युवा वाहिनी की सभी इकाइयों को भंग (Dissolve) कर दिया गया था।
भंग होने की तिथि 3 अगस्त 2022 थी.. इसके तहत संगठन की प्रदेश, क्षेत्रीय और जिला इकाइयों को आधिकारिक रूप से पूरी तरह से निष्क्रिय कर दिया गया था।
कहा ये गया था कि संगठन के कुछ पदाधिकारी संगठन के नाम का दुरुपयोग कर रहे है। नई रणनीति के तहत इसे भंग किया गया , न्यूज कोरियोडोर ने जब इसकी पड़ताल की तो पता चला कि तो हिन्दू युवा वाहिनी संगठन कभी पूरी तरह "खत्म" नहीं हुआ है, बल्कि इसका पुनर्गठन (Revamp) किया जा रहा है।नाम ना छपने की शर्त पर इससे जुडे नेताओं ने बताया कि हम लोग तो महाराज जी (योगी आदित्यनाथ के लिए ) के लिए काम करते है ।हिन्दू युवा वाहिनी को नए स्वरूप में लाया जा रहा है ,जिसका फायदा 2027 के विधान सभा चुनावों महाराज जी को दोबारा मुख्यमंत्री बनाया जा सके । आधिकारिक रूप से इसकी सक्रिय गतिविधियां पहले की तरह नही है, पर कई पुराने कार्यकर्ता नए लोगों को जोड़ रहे है हर जिले में इसका संगठन सक्रिय है ।
हिन्दू युवा वाहिनी की स्थापना ः
योगी आदित्यनाथ ने हिन्दू युवा वाहिनी की स्थापना अप्रैल 2002 में रामनवमी के दिन की थी।हिन्दू युवा वाहिनी की स्थापना का मुख्य उद्देश्य हिंदुत्व और राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना, छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म करना और पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों पर रोक लगाना था। हिन्दू युवा वाहिनी का मुख्यालय का मुख्य केंद्र और मुख्यालय गोरखपुर (गोरखनाथ मंदिर) रहा है ,जहां से मुख्यमंत्री आदित्यनाथ आते है ।
वर्तमान में हिन्दू युवा वाहिनी का नेटवर्क काफी बड़ा बताया जाता है .. जिसे officely निष्क्रिय करार दिया जा रहा है ।इन सबके बाद भी यूपी के सभी जिलों ने इसके संगठन बना है
उत्तर प्रदेश: यूपी में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश में सक्रिय है। इसके पास राज्य के सभी 75 जिलों में सक्रिय इकाइयां है जिसके हर जिले में पदाधिकारी है ।हिन्दू युवा वाहिनी का इसका सबसे मजबूत आधार पूर्वांचल (गोरखपुर, बस्ती, देवरिया, कुशीनगर, मऊ, आजमगढ़ आदि) है।
दबे पांव हिन्दू युवा वाहिनी अपना विस्तार दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी कर रही है। उत्तर प्रदेश के बाहर इसकी सक्रियता सीमित है।
हिन्दू युवा वाहिनी (HYV) के कई नेताओं के नाम समय-समय पर विभिन्न विवादों में रहे हैं। इनमें से कुछ विवाद राजनीतिक थे, तो कुछ आपराधिक मामलों और संगठन के भीतर अनुशासनहीनता से जुड़े थे।
वर्तमान में हिन्दू युवा वाहिनी के विवादित नेताओं में बनारस के हिन्दू युवा वाहिनी के नेता अम्बरीश सिंह भोला का है ...वर्तमान में अम्बरीश सिंह भोला वाराणसी विकास प्राधिकरण में मनोनीत सदस्य जिन्हें सरकार ने मनोनीत किया है ।हाल में पूरे देश में जब कोडिन कफ सीरफ कांड की बात हो रही थी, तो पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने भोला पर कई आरोप लगाएं । बाद में भोला के लोगों की तरफ से बनारस में अमिताभ ठाकुर पर एफआईआर दर्ज करवा दिया गया ।
इसके पहले भी हिन्दू युवा वाहिनी के नेता कई नेता विवादो में रहे उदाहरण के तौर पर कभी सीएम योगी के बेहद खास रहे हिन्दू युवा वाहिनी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह हिन्दू युवा वाहिनी के सबसे चर्चित और विवादित चेहरों में से एक रहे हैं।
2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान सुनील सिंह ने भाजपा के खिलाफ जाकर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी थी, जिससे योगी आदित्यनाथ नाराज हो गए। इसके बाद उन्हें संगठन से बाहर कर दिया गया।
इसके बाद सुनील सिंह ने हिन्दू युवा वाहिनी (भारत) का गठन किया उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में कई मामले दर्ज हुए और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। बाद में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए ।वही राघवेंद्र प्रताप सिंह जो डूमरियागंज से विधायक हुआ करते थे और हिन्दू युवा वाहिनी संगठन के कद्दावर नेता माने जाते है, वह अक्सर अपने तीखे और विवादास्पद बयानों के लिए चर्चा में रहते है। चुनाव प्रचार के दौरान उनके कुछ बयानों को लेकर चुनाव आयोग ने उन पर कार्रवाई भी की थी।हिन्दू युवा वाहिनी से जुड़े एक अन्य नेता पर डॉ आर.एम. सिंह और अन्य पदाधिकारियों पर अक्सर प्रशासन के साथ टकराव के आरोप लगते रहे हैं।
2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद, संगठन के कई कार्यकर्ताओं और नेताओं पर आरोप लगा कि वे पुलिस और प्रशासन के काम में दख़ल दे रहे हैं और 'एंटी-रोमियो स्क्वायड के नाम पर कानून हाथ में ले रहे हैं।
मुख्यमंत्री तक ऐसी शिकायतें पहुंची थीं कि कुछ नेता हिन्दू युवा वाहिनी संगठन के नाम का इस्तेमाल अवैध वसूली या निजी विवादों को निपटाने के लिए कर रहे हैं। यही एक बड़ा कारण था कि योगी आदित्यनाथ ने धीरे-धीरे संगठन से दूरी बनाई और अंततः इसकी सभी इकाइयों को भंग कर दिया गया ।2022 हिन्दू युवा वाहिनी को भंग कर दिए जाने के बाद योगी आदित्यनाथ को हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यक्रमों में शामिल होते हुए नही देखा। हाँ हिन्दू युवा वाहिनी संगठन से जुड़े नेता समय -समय पर योगी आदित्यनाथ से मिलते है और अपनी तस्वीरें डालना नहीं भूलते ।