Bihar Eco Tourism: 24 प्राकृतिक और जैव विविधता स्थलों की पूरी सूची

Authored By: News Corridors Desk | 06 Jan 2026, 05:58 PM
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पटना, 6 जनवरी। बिहार में विश्वविख्यात धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के अलावा प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता से जुड़े कई मनोरम स्थल भी मौजूद हैं। इनमें पर्यटकीय महत्व रखने वाले 24 स्थलों को चिन्हित करके जैव विविधता और प्राकृतिक महत्व के तौर पर विकसित किया गया है। ताकि यहां आकर पर्यटक प्राकृतिक नजारों का लुफ्त उठा सकें। ये स्थल प्राकृतिक प्रेमियों, वन्यजीव उत्साही और पर्यटकीय चाह रखने वालों के लिए आदर्श माने जा सकते हैं। फिलहाल वन एवं पर्यावरण संरक्षण विभाग इन स्थलों के अतिरिक्त कई नए स्थलों को इस फेहरिस्त में जोड़ने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। हाल में मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने नए प्राकृतिक स्थलों की खोज कर इको टूरिज्म के तौर पर विकसित करते हुए इसे इको टूरिज्म सर्किट में शामिल करने का निर्देश दिया था। इसका मकसद इको सर्किट को मजबूत कर राज्य में पर्यावरण अनुकूल पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देना है। 


इसके मद्देनजर विभाग ने मंथन शुरू कर दिया है। विभागीय स्तर पर नए स्थलों की पहचान कर यहां पर्यटकीय सुविधाएं विकसित कर इन्हें इको टूरिज्म सर्किट से जोड़ने की कवायद शुरू हो गई है। वर्तमान में राज्य में 24 प्राकृतिक स्थल हैं, जो इको टूरिज्म सर्किट में शामिल हैं। इसमें अलग-अलग स्थानों पर मौजूद वन्यजीव अभ्यारण्य, झील, जलप्रपात और पार्क शामिल हैं। 

वर्तमान में मौजूद 24 इको टूरिस्म स्थल
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व :- पश्चिम चंपारण स्थित बिहार का एकमात्र टाइगर रिजर्व। यहां बाघ, तेंदुआ, हाथी समेत विभिन्न प्रजाति के पक्षी देखे जा सकते हैं। जंगल सफारी और प्रकृति ट्रैकिंग के लिए प्रसिद्ध यह स्थान खासा लोकप्रिय है। 
अमवा मन झील :- पश्चिम चंपारण में ही बेतिया के नजदीक एक शांत झील है, जहां पक्षी विहार और बोटिंग का आनंद लिया जा सकता है। 
उदयपुर वन्यजीव अभ्यारण्य :- पश्चिम चंपारण में गंडक नदी के नजदीक यह स्थित है। इसी स्थान के पास बाढ़ क्षेत्र में स्थित ऑक्सबो झील भी है, जो प्रवासी पक्षियों और जलचरों का मुख्य ठिकाना है। 
विक्रमशिला गंगेय डॉल्फिन अभ्यारण्य :- भागलपुर में गंगा नदी के 60 किमी हिस्से में स्थित। विलुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन को संरक्षित करने के लिए एशिया का अपनी तरह का एकमात्र अभ्यारण्य। डॉल्फिन देखने और नदी सफारी के लिए यह उपर्युक्त स्थान है। 
भीमबांध वन्यजीव अभ्यारण्य :- मुंगेर के खरगपुर पहाड़ियों में स्थित यह स्थान गर्म पानी के झरने (हॉट स्प्रिंग्स) और तेंदुआ, भालू, नीलगाय जैसे वन्यजीवों के लिए मशहूर है। 
राजगीर नेचर एवं जू सफारी :- नालंदा जिले के राजगीर में मौजूद इस स्थान पर ग्लास ब्रिज, रोपवे और जू सफारी के साथ प्रकृति का अनोखा अनुभव लिया जा सकता है। शेर, तेंदुआ और प्रवासी पक्षी यहां आकर्षण के केंद्र हैं। 
घोड़ा कटोरा :- राजगीर में एक प्राकृतिक झील, चारों तरफ पहाड़ियों से घिरा है। पिकनिक और बोटिंग के लिए लोकप्रिय है। 
पांडु पोखर :- राजगीर के निकट एक प्राकृतिक और मनोरम तालाब है।
ककोलत :- नवादा में मनमोहक जलप्रपात है। 150 फीट ऊंचाई से यहां पानी गिरता है और आसपास के जंगल पर्यटकों को लुभाते हैं। गर्मियों में स्नान के लिए प्रसिद्ध। 
गढ़ी बांध, नागी और नकटी बांध :- जमुई में पक्षी अभयारण्य। प्रवासी पक्षियों का स्वर्ग, सर्दियों में हजारों पक्षी यहां आते हैं। 
इन्द्रपुरी बैराज :- रोहतास में सिंचाई और जल संरक्षण का केंद्र, साथ ही प्रकृति दृश्य। 
मांझर कुंड और धुआं कुंड :- कैमूर क्षेत्र में जलप्रपात और कुंड। 
तुतला भवानी जल प्रपात :- सासाराम के निकट सुंदर जलप्रपात। 
कशिश जल प्रपात :- कैमूर में एक और आकर्षक जलप्रपात। 
बांका ओढ़नी बांध :- बांका में बांध और आसपास का प्राकृतिक क्षेत्र। 
कैमूर अभ्यारण्य: बिहार का सबसे बड़ा अभयारण्य है। काला हिरण और विभिन्न वन्यजीवों का घर। तेलहर कुंड जलप्रपात: रोहतास-कैमूर में खूबसूरत झरना है। 
करकटगढ़ जलप्रपात: कैमूर की पहाड़ियों के बीच शानदार झरना है। 
बेगुसराय का कांवर झील :- एशिया की सबसे बड़ी झील है। रामसर साइट है, जो प्रवासी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना। 
दरभंगा का कुशेश्वर स्थान पक्षी अभ्यारण्य :- दरभंगा में कोसी नदी के निकट प्रवासी पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों से यह स्थान हमेशा भरा रहता है। 
गौतम बुद्ध वन्यजीव अभ्यारण्य :- गया में में मौजूद यह अभ्यारण्य कई पशु-पक्षियों का आश्रय स्थल है। 
संजय गांधी जैविक उद्यान :- पटना का लोकप्रिय जू एवं बॉटनिकल गार्डन। बाघ, शेर, हाथी और सैकड़ों प्रजातियों का घर। शहर में प्रकृति का अनुभव। 
इको पार्क :- पटना में राजधानी वाटिका के नाम से जाना जाता है। हरियाली और मनोरंजन का केंद्र।