भारतीय रेलवे अपने भविष्य को तेज़, सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए कई महत्वाकांक्षी पहलों पर काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारतीय रेलवे दुनिया का पहला शून्य कार्बन उत्सर्जन (Net Zero) वाला रेलवे नेटवर्क बने। इससे न केवल परिवहन प्रणाली में सुधार होगा, बल्कि देश के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को भी बल मिलेगा।
रेलवे का 100% विद्युतीकरण अभियान 2025-26 तक पूरा होने के करीब है। यह कदम भारतीय रेलवे को हरित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके साथ ही देश ने अपनी पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन ‘नमो ग्रीन रेल’ तैयार की है, जिसका परीक्षण हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर किया जा रहा है। यह ट्रेन प्रदूषण रहित तकनीक पर आधारित है और भविष्य में भारतीय रेलवे को और अधिक पर्यावरण-मित्र बनाने में मदद करेगी।
भारतीय रेलवे ने 7,134 कोचों का निर्माण कर नई और तेज़ वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाई है। इन ट्रेनों में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं, आराम और उच्च गति का अनुभव मिलेगा। विशेष रूप से, जनवरी 2026 में पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू होने की उम्मीद है, जो लंबी दूरी की यात्रा को और भी सुविधाजनक बनाएगी।
साथ ही रेलवे नेटवर्क के आधुनिकीकरण, निजी निवेश और नई तकनीक पर जोर दिया जा रहा है। इससे सुरक्षा बढ़ेगी, सुविधाओं में सुधार होगा और यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा। रेलवे की योजना है कि 2030 तक 48 प्रमुख शहरों के स्टेशनों की क्षमता दोगुनी कर दी जाएगी, जिससे ट्रेनों की संख्या और रफ्तार में वृद्धि होगी।
ये सभी प्रयास भारतीय रेलवे को राष्ट्रीय विकास का एक मजबूत स्तंभ बनाते हुए, देश के नागरिकों के लिए तेज़, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन का उदाहरण पेश कर रहे हैं। इससे न केवल यात्रियों का अनुभव सुधरेगा, बल्कि भारत को वैश्विक परिवहन मानकों के करीब लाने में मदद मिलेगी।