जौहर यूनिवर्सिटी विवाद: क्या है मामला
जौहर यूनिवर्सिटी रामपुर में स्थित एक निजी विश्वविद्यालय है, जिसे मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट द्वारा स्थापित किया गया था और इसका नाम समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता आज़म खान से जुड़ा रहा है। विवाद 2017 से शुरू हुआ जब यूनिवर्सिटी और उसके परिसर से जुड़े कई कानूनी और भूमि विवाद सामने आए। ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी पर भूमि विवाद, जमीन कब्जाने और नियमों का उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
भूमि विवाद और राजस्व कार्रवाई
उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व न्यायालय ने पाया कि यूनिवर्सिटी ट्रस्ट को शासन द्वारा दी गई भूमि के नियमों का पालन नहीं किया गया है। इसके चलते यूनिवर्सिटी के नाम पर दर्ज साढ़े 12 एकड़ भूमि छोड़कर बाकी लगभग 1400 बीघा जमीन को राज्य सरकार की संपत्ति घोषित किया गया है और उस पर प्रशासन द्वारा कब्जा किया जा रहा है।
मुकदमों का सिलसिला और इस्तीफा
जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट को लेकर 30 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें जमीन विवाद, धोखाधड़ी और अन्य कानूनी जटिलताएँ शामिल हैं। इस बढ़ते दबाव के बीच आज़म खान, उनकी पत्नी और बेटे अब्दुल्ला आज़म ने ट्रस्ट के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, और ट्रस्ट के संचालन के लिए नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है।
अन्य कानूनी प्रक्रियाएँ
इस विवाद में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक के मामले भी शामिल रहे हैं, जैसे जमीन की लीज रद्द करने के फैसले और जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर सरकारी कार्यवाहियों की याचिकाएँ। यूनिवर्सिटी से जुड़े कई मुकदमे, भूमि कब्जाने और नियमों के उल्लंघन से संबंधित न्यायालय में लंबित रहे हैं।