प्रशासन ने स्नान से रोकने से किया इंकार
प्रयागराज मेला प्राधिकरण में आयोजित प्रेस वार्ता में मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने साफ किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करने से नहीं रोका गया था। उनसे केवल आग्रह किया गया था। प्रशासन की आपत्ति स्नान को लेकर नहीं, बल्कि पहिया लगी पालकी को लेकर थी, जिस पर सवार होकर वह संगम नोज तक जाना चाहते थे।
मंडलायुक्त के अनुसार, उस समय संगम नोज पर स्नानार्थियों की अत्यधिक भीड़ थी। ऐसे में पहिया लगी पालकी के साथ घाट तक जाने से भगदड़ या किसी भी अप्रिय घटना की आशंका थी, इसी कारण प्रशासन ने रोक लगाई।
बिना अनुमति के बैरियर तोड़ने का आरोप
मंडलायुक्त ने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना पूर्व सूचना के सैकड़ों अनुयायियों के साथ वाहनों से संगम क्षेत्र के बैरियर तक पहुंचे थे। उन्होंने शनिवार को दो वाहन, सुरक्षा और प्रोटोकॉल की मांग की थी, जिसे प्रशासन ने अस्वीकार कर दिया था। इसके बावजूद वे बिना अनुमति आगे बढ़े और पांटून पुल संख्या दो का बैरियर तोड़ते हुए संगम की ओर बढ़े।
इसके बाद भी वे नहीं रुके और संगम टावर के पास लगे बैरियर को भी तोड़ दिया। उस समय संगम क्षेत्र में स्नानार्थियों का अत्यधिक दबाव था, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई।
सीसीटीवी फुटेज से होगी जांच
जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि ज्योतिष्पीठ और बदरिकाश्रम पीठ से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कराना प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने बताया कि बैरियर तोड़ने और संगम मार्ग को करीब तीन घंटे तक बाधित रखने की घटनाओं की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच कराई जा रही है। जांच के बाद नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इस दौरान अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डॉ. अजयपाल शर्मा, डीआईजी मुख्यालय विजय ढुल, एसपी मेला नीरज पांडेय और उप मेलाधिकारी विवेक शुक्ला भी मौजूद रहे।
तीन घंटे बाधित रहा संगम मार्ग
मेलाधिकारी ऋषि राज ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम के कारण संगम का मुख्य वापसी मार्ग लगभग तीन घंटे तक बाधित रहा। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सैकड़ों पुलिसकर्मियों को चेन बनाकर व्यवस्था संभालनी पड़ी।