नरेन्द्र मोदी ने वो कर दिया भारत के किसी पीएम ने नहीं किया :-
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कार्यकाल के दौरान भारत से चोरी हुई और तस्करी कर विदेशों को भेज दी गई , सांस्कृतिक धरोहरों को वापस लाने के अभियान में शानदार काम हुआ है ।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ जनवरी 2026 तक की सरकारी रिपोर्ट्स कहती है, कि 2014 के बाद से अब तक 640 से अधिक प्राचीन वस्तुएं और कलाकृतियां भारत वापस लाई जा चुकी हैं। आँकड़ों पर नजर डाले तो 2014 यानि मोदी सरकार के पहले की सरकारों की तरफ से 1976 से 2013 के बीच केवल 20 से भी कम वस्तुएं भारत वापस लाई जा सकी थीं ।2004-2013 के बीच तो केवल 1 वस्तु को ही सरकार वापस ले आ पाई ।वही 2014 से 2026 बीच अब तक 640 से अधिक कलाकृतियां और पुरावशेष सरकार वापस ले कर आ चुकी हैं।भारत की धरोहरों को वापस करने में अमेरिका (USA) सबसे आगे है । अमेरिका से अकेले अब तक लगभग 578 धरोहरों को वापस भेजा गया है। सितंबर 2024 में पीएम मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान 297 कलाकृतियां सौंपी गई थीं, जो अब तक सबसे ज्यादा है ।वही अन्य देशों की तरफ से भी धरोहरो को वापस करने का क्रम जारी है इसमें ऑस्ट्रेलिया से भी 40 से ज़्यादा धरोहरों को भारत वापस लाया गया है , ब्रिटेन से 16 से भी ज्यादा धरोहर लाए गए है ,जब की कनाडा, जर्मनी, सिंगापुर और नीदरलैंड जैसे देशों से भी कई महत्वपूर्ण मूर्तियां और अवशेष वापस दिए गए हैं। मां अन्नपूर्णा की ऐतिहासिक 18वीं सदी की मूर्ति वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के एक मंदिर से चोरी हुई थी।मां अन्नपूर्णा की यह मूर्ति लगभग 100 साल पहले वर्ष "1913" के आसपास मंदिर से चुराकर तस्करी के जरिए भारत से बाहर भेज दी गई थी।भारत सरकार ने यह मूर्ति कनाडा से वापस लेकर आने का काम किया है। इसे कनाडा की 'यूनिवर्सिटी ऑफ रेजिना' के 'मैकेंजी आर्ट गैलरी' के संग्रह में पाया गया था। भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों के बाद, इसे नवंबर 2021 में भारत वापस लाया गया ।वापस लाए जाने के बाद इसे पूरे विधि-विधान के साथ वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में फिर से स्थापित किया गया।माँ अन्नपूर्णा की यह मूर्ति चुलक शैली (पत्थर की नक्काशी) में बनी है । इसका वापस आना भारत की सांस्कृतिक विरासत की बहाली के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जाता है। वही नटराज की प्रतिमा जो12 वीं शताब्दी की बताई जाती है यह कांस्य की नटराज मूर्ति भारत में वापस लाई गई है । नटराज की यह सबसे प्रसिद्ध मूर्तियों में से एक है। यह चोल काल (11वीं-12वीं शताब्दी) की कांस्य प्रतिमा है, जिसकी वापसी की पूरी दूनिया में चर्चा हुई ।आप को बताते चले की यह बेशकीमती नटराज मूर्ति तमिलनाडु के अरियालुर (Ariyalur) जिले के श्रीपुरंतन (Sripuranthan) गांव में स्थित बृहदीश्वर मंदिर (Sivan Temple) से चोरी हुई थी। इसे साल 2006 के आसपास मंदिर से चुराया गया था।चोरी के बाद इसे अवैध रूप से भारत के बाहर भेज दिया गया ।इसे न्यूयॉर्क के कुख्यात कला तस्कर सुभाष कपूर के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया भेजा गया था।नटराज की मूर्ति की वापसी की दिलचस्प कहानी है। इसे ऑस्ट्रेलिया की नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया (NGA) ने 2008 में लगभग 5 मिलियन डॉलर (करीब 30 करोड़ रुपये) में खरीदा था। जब भारतीय जांच एजेंसियों ने इसके चोरी होने के प्रमाण पेश किए, तो तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने खुद सितंबर 2014 में भारत यात्रा के दौरान इस चोरी गई नटराज की मूर्ति को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सौंपा था।इसके अलावा बाहुबली और बुद्ध की प्रतिमाएं जो विभिन्न कालखंडों की धातु और पत्थर से बनी दुर्लभ मूर्तियां भी भारत लाई गई है। इसमें प्रमुख रूप से योगिनी वृषानना और पैरेट लेडी, फ्रांस और कनाडा से वापस लाई गई.. ऐतिहासिक मूर्तियां शामिल है ।जनवरी, 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में इन बाहर से लाए पवित्र अवशेषों की एक भव्य अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी (Grand International Exposition) का उद्घाटन किया।बुद्ध से सम्बन्धित अवशेष उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के पिपरहवा (जिसे प्राचीन कपिलवस्तु माना जाता है) से संबंधित हैं।इन्हें 1898 में एक ब्रिटिश इंजीनियर विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने खोजा था। औपनिवेशिक काल के दौरान इन्हें भारत से बाहर ले जाया गया था। ये अवशेष लगभग 127 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भारत वापस लाए गए हैं।2025 में इन पवित्र अवशेषों को हॉन्गकॉन्ग में सोथबी (Sotheby's) द्वारा नीलाम करने की योजना थी। भारत सरकार ने समय पर हस्तक्षेप किया और कूटनीतिक प्रयासों और 'गोदरेज इंडस्ट्रीज ग्रुप' के सहयोग (Public-Private Partnership) से इस नीलामी को रुकवाकर इन्हें स्वदेश वापस लाया। सालों बाद भारत लाए गए पवित्र अवशेषों को देश और दुनिया के लोग देख सके.. इस क्रम में प्रदर्शनी लगाई गई है, इसे The Light & the Lotus Relics of the Awakened One' नाम दिया गया है। इसमें न केवल हाल ही में वापस आए अवशेष शामिल हैं, बल्कि राष्ट्रीय संग्रहालय (दिल्ली) और भारतीय संग्रहालय (कोलकाता) में पहले से मौजूद बुद्ध के अन्य अवशेषों को भी पहली बार एक साथ प्रदर्शित किया गया है।देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अवसर पर कहा कि “भारत के लिए बुद्ध के अवशेष केवल ऐतिहासिक वस्तुएं या म्यूजियम के आर्टिफैक्ट्स नहीं हैं, बल्कि यह हमारी सभ्यता की जीवंत और अटूट धरोहर हैं।"पिछले कुछ वर्षों में भारत ने बुद्ध से जुड़ी अन्य धरोहरों को भी सुरक्षित किया है ।हाल के वर्षो में दुनिया भर से भारत बुद्द के अवशेष को भारत लाने और बाहर भेजने का काम कर रहा है .. इस क्रम में 2022 में भारत से भगवान बुद्ध के 4 पवित्र अवशेषों (कपिलवस्तु अवशेष) को राजकीय अतिथि के रूप में मंगोलिया भेजा गया था, जिससे बौद्ध कूटनीति (Buddhist Diplomacy) को बल मिला।बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल को वैश्विक स्तर पर जोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में विशेष बुनियादी ढांचा विकसित किया गया है।