यूपी में ओला-उबर पर सख्ती, अब रजिस्ट्रेशन के बाद ही चला सकेंगे कैब

Authored By: News Corridors Desk | 11 Mar 2026, 02:32 PM
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उत्तर प्रदेश में अब ओला, उबर और अन्य ऑनलाइन टैक्सी सेवाओं को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि अब इन कंपनियों को प्रदेश में कैब सेवा शुरू करने या चलाने से पहले अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना और कैब सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कैबिनेट बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि अब ओला, उबर और अन्य टैक्सी एग्रीगेटर कंपनियों को उत्तर प्रदेश में काम करने के लिए आधिकारिक रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा। इसके बिना कोई भी कंपनी कैब सेवा नहीं चला सकेगी। उन्होंने कहा कि अब बिना रजिस्ट्रेशन, वाहन के फिटनेस प्रमाणपत्र, ड्राइवर के मेडिकल टेस्ट और पुलिस सत्यापन के कोई भी टैक्सी सेवा संचालित नहीं की जा सकेगी। इससे यात्रियों की सुरक्षा और भरोसा दोनों बढ़ेंगे।

केंद्र सरकार के नियमों के आधार पर होगा फैसलापरिवहन मंत्री ने बताया कि यह व्यवस्था केंद्र सरकार के नियमों के आधार पर लागू की जा रही है। Motor Vehicles Act 1988 की धारा 93 के तहत केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2025 को नियमों में बदलाव किया था। अब उत्तर प्रदेश सरकार उन्हीं संशोधित नियमों को प्रदेश में लागू करने जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले इन कंपनियों पर स्पष्ट रूप से कोई मजबूत नियामक नियंत्रण नहीं था। लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत सभी टैक्सी एग्रीगेटर कंपनियों को तय प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करना होगा और लाइसेंस लेना होगा।नई व्यवस्था के तहत कैब चलाने वाले ड्राइवरों के लिए भी कई जरूरी शर्तें तय की गई हैं। हर चालक का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह वाहन चलाने के लिए पूरी तरह फिट है। इसके अलावा ड्राइवरों का पुलिस सत्यापन भी अनिवार्य होगा। साथ ही वाहन की फिटनेस जांच भी जरूरी होगी। सरकार का कहना है कि इससे यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा मिल सकेगी।

सरकार ने कैब एग्रीगेटर कंपनियों के लिए लाइसेंस शुल्क भी तय किया है। कंपनियों को लाइसेंस लेने के लिए 5 लाख रुपये का शुल्क देना होगा। इसके अलावा आवेदन करने के लिए 25 हजार रुपये आवेदन शुल्क तय किया गया है। यह लाइसेंस 5 साल के लिए मान्य होगा। लाइसेंस की अवधि पूरी होने के बाद उसके नवीनीकरण के लिए 5 हजार रुपये का शुल्क देना होगा। सरकार कैब सेवाओं से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करने के लिए एक खास ऐप भी विकसित करेगी। इस ऐप के जरिए लोग कैब सेवा से जुड़ी जरूरी जानकारी आसानी से देख सकेंगे।इसमें ड्राइवर का विवरण, वाहन की जानकारी और अन्य जरूरी सूचनाएं भी उपलब्ध होंगी। इससे यात्रियों को सफर के दौरान ज्यादा पारदर्शिता और भरोसा मिलेगा।सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से उत्तर प्रदेश में कैब सेवाएं ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनेंगी। साथ ही यात्रियों को बेहतर सुविधा और भरोसेमंद सेवा मिल सकेगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश में चल रही सभी टैक्सी एग्रीगेटर कंपनियों को तय नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।