अमेरिका का बड़ा फैसला: रूस-ईरान तेल पर भारत को मिली छूट खत्म, बढ़ा दबाव

Authored By: News Corridors Desk | 16 Apr 2026, 07:33 PM
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अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीद को लेकर भारत को दी गई अस्थायी राहत को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के प्रमुख स्कॉट बेसेंट ने साफ कर दिया है कि अब इन दोनों देशों के तेल पर लगे प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का यह कदम संकेत देता है कि वॉशिंगटन अब रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव और सख्त करना चाहता है।

दरअसल, मार्च 2025 में अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की सीमित छूट दी थी, ताकि भारतीय रिफाइनरियां पहले से टैंकरों में लदे रूसी तेल की खरीद पूरी कर सकें। उस समय वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी थीं और सप्लाई बनाए रखना जरूरी था। इसी वजह से यह अस्थायी राहत दी गई थी।

इस छूट का भारत को बड़ा फायदा मिला। भारत ने रूस से लगभग 3 करोड़ बैरल तेल के ऑर्डर दिए थे। काफी कंपनियों ने पहले रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया था, जैसे रिलायंस... उन्होंने भी दोबारा खरीद शुरू कर दी। हालांकि, अमेरिका के भीतर इस फैसले का विरोध भी हुआ, खासकर कुछ सीनेटरों और नेताओं ने इसे रूस और ईरान के लिए आर्थिक मदद बताया।

अमेरिकी नेताओं का तर्क था कि इस छूट से रूस को भारी आर्थिक लाभ हो रहा है, जिसका इस्तेमाल वह यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध में कर सकता है। इसी दबाव के चलते अब अमेरिका ने यह राहत खत्म करने का फैसला लिया है। रूस से तेल खरीदने की आखिरी तारीख 11 अप्रैल तय की गई थी, जबकि ईरान के मामले में यह समयसीमा 19 अप्रैल तक है। भारत समेत कई एशियाई देशों ने इस छूट को आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन अमेरिका ने इसे मंजूरी नहीं दी।

कुल मिलाकर, यह फैसला भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों के मोर्चे पर नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है, क्योंकि अब उसे वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज करनी पड़ सकती है। यह वैश्विक राजनीति और दबाव की नई चाल भी है। एक तरफ अमेरिका रूस और ईरान को आर्थिक रूप से घेरना चाहता है, तो दूसरी तरफ भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों और कूटनीतिक संतुलन के बीच रास्ता निकालना होगा। आने वाले दिनों में साफ होगा कि भारत इस दबाव का जवाब कैसे देता है, समझौते से या अपनी रणनीति से खेल बदलकर।