राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस का बड़ा एक्शन, 5 विधायकों पर गिरी गाज

Authored By: News Corridors Desk | 16 Apr 2026, 05:27 PM
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हरियाणा में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने अनुशासनहीनता के आरोप में अपने ही कुछ विधायकों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने व्हिप का उल्लंघन और क्रॉस वोटिंग के मामले में पांच विधायकों को प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है।

चुनाव के दौरान यह सामने आया था कि कांग्रेस के कुछ विधायकों ने अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ मतदान किया था। हालांकि, राहत की बात यह रही कि कांग्रेस उम्मीदवार करमबीर बौद्ध बेहद मामूली अंतर से चुनाव जीतने में सफल रहे। हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र की ओर से जारी पत्र में बताया गया कि यह कार्रवाई प्रदेश अनुशासन समिति की सिफारिश और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी के बाद की गई है। पत्र में स्पष्ट कहा गया कि संबंधित विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर गंभीर अनुशासनहीनता की है, जिसे संगठन में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जिन विधायकों पर कार्रवाई हुई है, उनमें शैली चौधरी (नारायणगढ़), रेणु बाला (सढ़ौरा), सरदार जरनैल सिंह (रतिया), मोहम्मद इलियास (पुन्हाना) और मोहम्मद इजराइल (हथीन) शामिल हैं।

राज्यसभा चुनाव की बात करें तो हरियाणा की दो सीटों पर मुकाबला हुआ था। एक ओर भाजपा के संजय भाटिया ने आसानी से जीत दर्ज की, वहीं दूसरी सीट पर कांग्रेस के करमबीर बौद्ध और निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नंदल के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। मतदान के दौरान 88 विधायकों ने वोट डाले, लेकिन पांच वोट अमान्य घोषित हो गए। इसके बाद वैध मतों की संख्या 83 रह गई। करमबीर बौद्ध को 28 वोट मिले, जो जीत के लिए जरूरी आंकड़े से थोड़ा अधिक थे, जबकि सतीश नंदल को 16 वोट मिले। क्रॉस वोटिंग और रद्द वोटों के चलते मुकाबला दिलचस्प हो गया था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि अनुशासन तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। अब पार्टी ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि संगठन में नियमों का पालन सर्वोपरि है और किसी भी तरह की गड़बड़ी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

कुल मिलाकर, कांग्रेस ने इस कार्रवाई के जरिए साफ संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी लाइन से हटकर चलने वालों के लिए कोई नरमी नहीं होगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का हरियाणा की राजनीति और पार्टी के आंतरिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है, और क्या इससे भविष्य में क्रॉस वोटिंग जैसी घटनाओं पर रोक लग पाती है।