भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और EPCMD के नेतृत्व में चिंतन शिविर का आयोजन किया गया। जिसका विषय "भारत के चिकित्सा उपकरण निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के साथ ही 2030 तक $30 बिलियन का मार्केट साइज हासिल करना (30@30)" है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य "30@30" के लक्ष्य को प्राप्त करना है, यानी वर्ष 2030 तक भारतीय चिकित्सा उपकरण बाजार को 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाना। इस शिविर में वैश्विक व्यापार, ब्रांड इंडिया के निर्माण और नियामक चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में तीन सत्र रखे गए थे।
आयोजित किए गए अलग-अलग सत्रों का मुख्य उद्देश्य भारत को चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में एक वैश्विक पहचान (Brand India) दिलाना है। इसमें
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बुनियादी ढांचा (Infrastructure): विश्व-स्तरीय विनिर्माण सुविधाओं का विकास।
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वित्त पोषण (Funding): अनुसंधान और विकास (R&D) के लिए निवेश की उपलब्धता।
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नियामक सामंजस्य (Regulatory Harmonisation): वैश्विक मानकों के अनुरूप नियमों को सरल बनाना।
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वैश्विक बाजार पहुंच (Global Market Access): भारतीय उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के द्वार खोलना।
उद्योग जगत के वक्ता (Industry Speakers):
सत्र में चिकित्सा उपकरण क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए:
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श्री गुरमीत सिंह चुग (Translumina)
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श्री हिमांशु बैद (Poly Medicure)
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श्री मनीष रचछ (Accuprec)
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श्री एन श्रीराम (Molbio)
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श्री राजीव गौतम (Horiba)
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श्री सुनील सिंह (Univ Labs)
UNIVLAB के फाउंडर एवं एमडी सुनील सिंह ने इस कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि आप क्वालिटी की बात करते हैं, पर जब मानक नहीं होगा तो किसी भी प्रोडक्ट में गुणवत्ता कैसे आएगी। UNIVLAB जो पूरी तरह स्वदेशी स्टार्टअप है, उनकी तरफ से सुनील ने साफ कहा कि आप मानक को स्थापित करने में अपना समय जाया न करें। बेहतर मानक के लिए अन्य देशों के साथ भारत सरकार को समझौता करना चाहिए। मानक आने पर गुणवत्ता अपने आप आ जाएगी। इसमें समय बर्बाद न करें।
सुनील ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि हिंदुस्तान में सारे फ्रॉड गरीब के नाम पर होते हैं, पर आप जैसे ही गरीब की बात करते हैं उसका प्रोडक्ट पर बहुत असर पड़ता है। अगर सस्ते की बात की तो हम प्रोडक्ट अच्छा कैसे बनाएँगे। हमारे देश में बहुत बड़ा वॉल्यूम है। जब हम शानदार प्रोडक्ट देंगे और उसके परिणाम बेहतर आने लगेंगे तो वॉल्यूम अपने आप बढ़ जाएगा।
सुनील ने यह भी कहा कि भारत सरकार की पॉलिसी क्लियर होनी चाहिए। जो नंबर डाले जा रहे हैं उन्हें कौन चेक करेगा। वहीं हर कोई भारत सरकार से सहायता लेता है, पर यह जनता का पैसा है। अगर कोई प्रोजेक्ट सरकार से पैसा लेकर समय पर पूरा नहीं होता है तो उसे सरकार की संपत्ति घोषित कर देना चाहिए।
सभी सत्रों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि भारत केवल चिकित्सा उपकरणों का निर्माता ही न बने, बल्कि "ब्रांड इंडिया" के माध्यम से गुणवत्ता और नवीनता (Innovation) का वैश्विक प्रतीक बने। सरकारी नीतियों (DOC) और उद्योग जगत के अनुभवों के मेल से 2030 तक $30 बिलियन के लक्ष्य को प्राप्त करने का रोडमैप तैयार किया गया।