दिल्ली।संकट के समय देश में लोगों को महत्वपूर्ण जानकारी बिना किसी देरी के पहुँचाने के लिए शनिवार को 'सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम' CBS का सफल परीक्षण Test किया गया। परीक्षण के दौरान, पूरे देश में मोबाइल फोन पर एक खास चेतावनी टोन के साथ आपातकालीन संदेश भेजे गए।
इस अवसर पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम की शुरुआत भारत के आपदा प्रबंधन ढांचे में एक बड़ा बदलाव लाने वाला कदम है। यह नागरिकों की सुरक्षा के लिए 'हादसे के बाद कदम उठाने' के बजाय 'हादसे से पहले तैयारी' के हमारे नए दृष्टिकोण को दर्शाता है। “
इससे पहले सिंधिया ने CBS का शुभारंभ किया। यह एक स्वदेशी तकनीक है जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में दूरसंचार विभाग DoT के सेंन्टर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स C-DoT ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण NDMA और गृह मंत्रालय MHA के सहयोग से विकसित किया गया है।
कुछ सेकेंड में मिलेगा अलर्ट
सीबीएस सटीक जियो-टारगेटिंग क्षमता प्रदान करता है, जिससे अलर्ट को अलग-अलग सेल टावरों या समूहों के स्तर पर भेजा जा सकता है, या फिर जरूरत पड़ने पर बड़े क्षेत्रों तक बढ़ाया जा सकता है। ये संदेश बिना किसी वेटिंग या कतार के कुछ ही सेकंड में सीधे यूजर्स तक पहुँच जाते हैं।
अलर्ट बंद नहीं किया जा सकता
उच्च विश्वसनीयता के लिए डिजाइन किया गया यह सिस्टम नेटवर्क जाम होने पर भी अप्रभावित रहता है, जिससे संकट के समय निर्बाध संचार बना रहता है। यह लक्षित क्षेत्र के सभी मोबाइल यूजर्स तक पहुँचता है, जिसमें रोमिंग वाले यूजर्स भी शामिल हैं। खास बात यह है कि यूजर्स इन अलर्ट्स को बंद नहीं कर सकते। इसके अलावा, ये अलर्ट प्रायोरिटी नोटिफिकेशन के रूप में एक पॉप-अप मैसेज और तेज आवाज के साथ आते हैं और कई फोन में इन संदेशों को बोलकर सुनाने की सुविधा भी दी गई है।
रियल टाइम में कई भाषा में संदेश
यह सिस्टम लगभग रियल-टाइम और कई भाषाओं में अलर्ट भेजने की सुविधा देता है, जिससे अचानक आई बाढ़ और गैस रिसाव जैसी आपदाओं के समय बचाव के लिए महत्वपूर्ण समय मिल जाता है। यह 2जी से लेकर 5जी तक के सभी नेटवर्क पर काम करता है, जिससे शहरों से लेकर दूर-दराज के गाँवों तक और रोमिंग वाले लोगों तक भी इसकी पहुँच सुनिश्चित होती है।
चारधाम यात्रा में इस्तेमाल
CBS का पूरे भारत में परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में इसका प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। यह प्रणाली आपदाओं के दौरान बेहद प्रभावी साबित हुई है, जिससे आंध्र प्रदेश, ओडिशा और उत्तराखंड में लाखों लोगों तक सूचना पहुँचाई गई। अब इसका उपयोग चारधाम यात्रा के लिए भी किया जा रहा है।