कांकेर जिला से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विस्फोट में जिला रिजर्व गार्ड (DRG) के तीन जवान शहीद हो गए। यह घटना छोटेबेठिया थाना क्षेत्र में हुई, जो नारायणपुर जिला की सीमा के पास स्थित है। सुरक्षाबल इलाके में गश्त और बारूदी सुरंग को निष्क्रिय करने के मिशन पर थे, तभी नक्सलियों द्वारा लगाए गए विस्फोटक में धमाका हो गया। इस हमले ने एक बार फिर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद खतरों को उजागर कर दिया है।
इस हमले में शहीद हुए जवानों की पहचान कृष्णा कोमरा, सुखराम वट्टी और परमानंद कोमरा के रूप में हुई है। ये सभी DRG के साहसी जवान थे और नक्सल विरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। वहीं, इस विस्फोट में आरक्षक संजय गढ़पाले घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी स्थिति पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में छत्तीसगढ़ को 31 मार्च को सशस्त्र माओवादियों से मुक्त घोषित किया गया था। इसके बावजूद इस तरह का हमला यह दिखाता है कि नक्सल गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। नक्सली अक्सर आईईडी का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि यह घात लगाकर हमला करने का एक प्रभावी तरीका है। जंगल और दूरदराज के क्षेत्रों में इस तरह के हमलों का खतरा लगातार बना रहता है, जिससे सुरक्षा बलों के सामने चुनौती और बढ़ जाती है।
घटना के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। यह हादसा साफ संकेत देता है कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और लगातार सतर्कता जरूरी है। शहीद जवानों का बलिदान देश के लिए सर्वोच्च है, जिसे हमेशा सम्मान के साथ याद रखा जाएगा।