बिहार की राजनीति इस वक्त बेहद दिलचस्प दौर से गुजर रही है। CM नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य की कमान किसके हाथ में जाएगी। उनके इस कदम के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है और हर तरफ नए CM को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हाल ही में नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली और इसके बाद दिल्ली से पटना लौट आए। इस घटनाक्रम के बाद सियासी गलियारों में हलचल और बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, CM पद की रेस में करीब 6 बड़े नाम शामिल हैं, जिससे सस्पेंस और गहरा गया है। हालांकि अभी तक किसी एक नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार ऐसा चेहरा चुना जाएगा जो गठबंधन की राजनीति को संतुलित रख सके। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी की एक अहम कोर ग्रुप बैठक होने जा रही है। इस बैठक में पार्टी के कई बड़े नेता शामिल होंगे, जिनमें नितिन नवीन भी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि इस मीटिंग में बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा कर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाए रखने की होगी। भाजपा और जनता दल (यूनाइटेड) दोनों मिलकर ऐसा नेता चुनना चाहेंगे जो न केवल सरकार को स्थिर रखे, बल्कि भविष्य की राजनीति में भी मजबूत भूमिका निभा सके। फिलहाल बिहार में सस्पेंस अपने चरम पर है। जनता से लेकर राजनीतिक दलों तक, सभी की नजर आने वाले दिनों में होने वाले फैसलों पर टिकी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश कुमार के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी किसे मिलती है और यह बदलाव राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।