नालंदा में मासूम की हत्या: मौसी पर लगा हत्या का आरोप

Authored By: News Corridors Desk | 10 Apr 2026, 08:08 PM
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बिहार के नालंदा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने इंसानी रिश्तों को झकझोर कर रख दिया है। अस्थावां थाना क्षेत्र के चुल्हारी गांव में एक साल के मासूम बच्चे की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस जघन्य अपराध का आरोप बच्चे की अपनी मौसी पर लगा है।

मृतक बच्चे की पहचान राजू पासवान के एक वर्षीय पुत्र अशोक कुमार उर्फ कारू के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, राजू पासवान रोजी-रोटी के सिलसिले में बाहर रहते हैं, जबकि उनकी पत्नी आरती देवी अपने मायके चुल्हारी गांव में रह रही थीं। इस घटना के पीछे अंधविश्वास और पारिवारिक विवाद की पृष्ठभूमि सामने आई है। बताया जा रहा है कि आरती देवी की बड़ी बहन सुमंत्री देवी का मोबाइल फोन गुम हो गया था। इसके बाद वह एक कथित बाबा के पास गईं, जिसने “पानी पढ़कर” दिया और कहा कि इसे घर के सभी लोग पिएं, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

परिवार के अन्य लोगों ने वह पानी पी लिया, लेकिन आरती देवी ने इसे पीने से इनकार कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों बहनों के बीच विवाद हो गया, जो धीरे-धीरे गंभीर रूप लेता चला गया।

गुरुवार की रात अचानक मासूम कारू घर से लापता हो गया। परिजनों ने उसे हर जगह तलाशा, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। पूरी रात परिवार और ग्रामीण बच्चे की खोज में जुटे रहे।अगली सुबह गांव के पास स्थित एक तालाब में बच्चे का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। स्थानीय चौकीदार के अनुसार, बच्चे की मौसी पर आरोप है कि उसने ही मासूम को उठाकर तालाब में फेंक दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस सूचना के बाद पुलिस तुरंत हरकत में आई।

थाना प्रभारी उत्तम कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी ने बच्चे को सोते समय उठाया और पास के पानी भरे तालाब में फेंक दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर बिहार शरीफ के मॉडल अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ जारी है। इस घटना ने न सिर्फ एक गंभीर अपराध को उजागर किया है, बल्कि अंधविश्वास और पारिवारिक विवाद के खतरनाक परिणाम को भी सामने लाया है।

आसान शब्दों में कहें तो, यह मामला समाज के लिए एक चेतावनी है कि अंधविश्वास और छोटे विवाद किस तरह भयावह रूप ले सकते हैं। ऐसी घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि जागरूकता और समझ की कितनी जरूरत है।