चुनाव से पहले गरमाता माहौल
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। राज्य में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधी और कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। हाल ही में असम में हुई बंपर वोटिंग और वहां उठे “घुसपैठ” के मुद्दे का असर अब बंगाल की राजनीति पर भी साफ दिख रहा है। बीजेपी इस मुद्दे को चुनाव का बड़ा एजेंडा बना रही है और जनता के बीच इसे जोर-शोर से उठा रही है। दूसरी तरफ टीएमसी इसे लोगों को बांटने की राजनीति बता रही है। कुल मिलाकर, चुनाव से पहले माहौल काफी तनावपूर्ण और राजनीतिक रूप से सक्रिय हो चुका है।
वोटर लिस्ट और SIR पर विवाद
चुनाव से पहले सबसे बड़ा विवाद मतदाता सूची को लेकर खड़ा हुआ है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन” (SIR) के नाम पर करीब 26 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं है और इसका इस्तेमाल वैध मतदाताओं को हटाने के लिए किया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। टीएमसी का मानना है कि इससे चुनाव प्रभावित हो सकता है, जबकि बीजेपी का कहना है कि यह प्रक्रिया गलत नामों को हटाने के लिए जरूरी है। इस विवाद ने चुनावी माहौल को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।
नेताओं के बीच तीखे बयान और टकराव
चुनाव नजदीक आते ही नेताओं के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है। नरेंद्र मोदी ने अपनी रैलियों में घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि अगर उनकी सरकार बनती है, तो घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें पनाह देने वालों को भी नहीं छोड़ा जाएगा। इसके जवाब में ममता बनर्जी ने तीखा हमला करते हुए पीएम मोदी को “सबसे बड़ा घुसपैठिया” तक कह दिया। वहीं बीजेपी ने टीएमसी के “मां-माटी-मानुष” नारे पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह नारा अब अपने असली उद्देश्य से भटक गया है। दोनों पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।
सुरक्षा, बड़े मुद्दे और जनता का फैसला
चुनाव को देखते हुए पश्चिम बंगाल में केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है ताकि मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से हो सके। हालांकि, ममता बनर्जी ने इस तैनाती का विरोध किया है और इसे राज्य के अधिकारों में दखल बताया है। इस बार का चुनाव सिर्फ विकास के मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सुरक्षा, पहचान, नागरिकता और घुसपैठ जैसे बड़े मुद्दे शामिल हो गए हैं। अब यह चुनाव पूरी तरह हाई-वोल्टेज मुकाबले में बदल चुका है। अंत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जनता किस मुद्दे को ज्यादा अहम मानती है और 2026 के चुनाव में किस पार्टी को अपना समर्थन देती है।