पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने कूटनीति को इंसानी भावनाओं से जोड़ दिया। जब ईरान का प्रतिनिधिमंडल शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचा, तो यह सिर्फ एक राजनीतिक यात्रा नहीं रही यह युद्ध में मारे गए मासूम बच्चों को श्रद्धांजलि देने का एक मार्मिक प्रयास बन गई।
इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मोहम्मद बाघेर गालिबाफ कर रहे हैं। उन्होंने अपने विमान में उन बच्चों की तस्वीरें रखीं, जो हाल ही में युद्ध में मारे गए थे। इन तस्वीरों के साथ खून से सने स्कूल बैग, जूते और सफेद फूल भी रखे गए थे। यह दृश्य बेहद भावुक था और यह दिखाता है कि युद्ध का सबसे ज्यादा असर निर्दोष बच्चों पर पड़ता है। उन्होंने इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा “इस फ्लाइट में मेरे साथी #Miban168 हैं।”
“मिनाब 168” नाम एक दर्दनाक घटना से जुड़ा है। 28 फरवरी को ईरान के मिनाब शहर में एक लड़कियों के स्कूल “शजारेह तैय्यिबेह” पर हमला हुआ था, जिसमें 160 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। ईरान ने इसके लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल को जिम्मेदार ठहराया, जबकि अमेरिका ने जांच की बात कही है।
जब यह ईरानी टीम पाकिस्तान पहुंची, तो उनका जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान इशाक डार, सरदार अयाज़ सादिक, आसिम मुनीर और मोहसिन नकवी जैसे बड़े नेता मौजूद रहे। इससे पता चलता है कि पाकिस्तान इस शांति वार्ता को बहुत गंभीरता से ले रहा है।
इस पूरी पहल का मकसद सिर्फ बातचीत करना नहीं, बल्कि दुनिया को यह दिखाना भी है कि युद्ध कितनी बड़ी त्रासदी लाता है। “मिनाब 168” के जरिए यह संदेश दिया जा रहा है कि शांति केवल एक राजनीतिक जरूरत नहीं, बल्कि मानवता के लिए जरूरी है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली यह बातचीत क्या कोई ठोस नतीजा दे पाएगी या नहीं। अगर दोनों देश समझदारी दिखाते हैं, तो यह पहल शांति की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।