राज्यसभा में AAP के 7 सांसदों का BJP में विलय: बड़ा राजनीतिक उलटफेर

Date: 2026-04-27
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दिल्ली। राज्यसभा के सभापति ने आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदस्य के रूप में औपचारिक मान्यता दे दी है। इस कदम से AAP को राज्यसभा में भारी नुकसान हुआ है, जबकि BJP की स्थिति और मजबूत हो गई।

राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन की मंजूरी के बाद जारी अधिसूचना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी।

विद्रोही सांसदों की सूची और कारण

इस समूह का नेतृत्व राघव चड्ढा ने किया, जिनके साथ संदीप पाठक, अशोक मित्तल, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह समेत अन्य शामिल हैं। इन नेताओं ने AAP के साथ वैचारिक मतभेदों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया। पार्टी नेतृत्व पर अनुशासनहीनता और नीतिगत असहमति के आरोप लगाए गए। स्वाति मालीवाल का मामला विशेष रूप से चर्चित रहा, जो पहले AAP की ओर से राज्यसभा सदस्य बनीं। अब AAP के पास राज्यसभा में केवल तीन सांसद बचे हैं, जो पहले दस थे।

AAP का कड़ा विरोध

AAP ने इसे दल-बदल कानून का स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखा। संजय सिंह ने इसे जनता के विश्वास का 'विश्वासघात' करार दिया और कानूनी कदम उठाने का ऐलान किया। अरविंद केजरीवाल ने पंजाबियों के साथ धोखा होने की बात कही। पंजाब AAP ने इन्हें 'गद्दार' कहा। हालांकि, सभापति ने विलय को मंजूर कर लिया।

अन्य दलों की प्रतिक्रियाएं

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने BJP की बढ़ती ताकत पर संतोष जताया। कांग्रेस ने इसे 'वॉशिंग मशीन पॉलिटिक्स' बताया, जहां विपक्षी नेता BJP में शामिल हो जाते हैं। यह घटना 2027 पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले AAP के लिए चुनौतीपूर्ण है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AAP में आंतरिक कलह अब सतह पर आ गया है। राघव चड्ढा जैसे युवा चेहरे का जाना पार्टी की रणनीति पर सवाल उठाता है। BJP को राज्यसभा में अब और मजबूती मिली, जो संसदीय बहसों में फायदेमंद साबित हो सकती है। कुल मिलाकर, यह भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ता है।

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