दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति चाहते हैं कि ईरान के साथ बातचीत हो, लेकिन अब तक ईरान ने अमेरिकी प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया है। हालांकि मंगलवार को ईरान के एक सीनियर अधिकारी ने संकेत दिया कि उनका देश पाकिस्तान में अमेरिका के साथ शांति वार्ता में शामिल होने पर विचार कर रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव कूटनीति की पतली डोर पर झूल रहा है, जहां शांति के प्रयासों के बीच युद्ध का साया गहराता जा रहा है। वार्ता से ठीक पहले ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की धमकियों के बीच बातचीत स्वीकार नहीं करेगा।
अब दोनों बयान मामले को उलझाते दिख रहे हैं क्योंकि गालिबाफ ने साफ चेतावनी दी है कि ईरान अब युद्ध के मैदान में नए पत्ते खोलने के लिए तैयार है, यानी जरूरत पड़ने पर कठोर और निर्णायक सैन्य कदम उठाए जा सकते हैं।
शांति वार्ता को लेकर तेज हो रही अटकलों के बीच गालिबाफ का यह बयान कई बड़े संकेत देता नजर आ रहा है। सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर ईरानी संसद अध्यक्ष कौन नए पत्ते को खोलने की बात कह रहे हैं? सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर इस नए पत्ते में वार्ता को लेकर कैसे संकेत हो सकते हैं? इसके साथ ही ये सवाल तो खूब पूछे जा रहे हैं कि ईरान अगर वार्ता को लेकर सकारात्मक संकेत नहीं दे रहा, तो ट्रंप का अगला कदम क्या होगा?
सबसे पहले गालिबाफ के बयान पर नजर डालते हैं। उन्होंने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाबंदियां लगाकर और सीजफायर का उल्लंघन कर कूटनीति को कमजोर किया है। उनके मुताबिक अमेरिका बातचीत को समर्पण में बदलना चाहता है या फिर नए युद्ध का बहाना ढूंढ रहा है। गालिबाफ ने दो टूक अंदाज में अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान धमकी के माहौल में बातचीत स्वीकार नहीं करेगा।
अगर इससे एक दिन पहले सोमवार की बात करें तो ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा था कि अमेरिका के साथ तनाव को कम करने के लिए हर तरह का कूटनीतिक रास्ता तलाशा जाना चाहिए। लेकिन उसके साथ उन्होंने यह भी जोड़ा था कि हाल की कार्वाई से अमेरिका पर अविश्वास बढ़ा है।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान हालांकि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची थोड़ा लचीला रुख़ अपनाते दिखाई दे रहे हैं जिनका कहना है कि अमेरिका के साथ रिश्तों को लेकर ईरान सभी पहलुओं की समीक्षा करेगा और फिर फैसला करेगा।
पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिफ़ मुनीर के अमेरिकी राष्ट्रपति के दूत के तौर पर पहल करने के बाद ईरान से अलग-अलग सुर उठ रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान में प्रस्तावित वार्ता को लेकर विशेषज्ञों के मन में संशय है।