प्रयागराज की संगम नगरी एक बार फिर एक दर्दनाक हादसे की वजह से सुर्खियों में है। फाफामऊ इलाके में सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुए आदर्श कोल्ड स्टोरेज हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यह हादसा इतना भयावह था कि इसकी गूंज आसपास के कई किलोमीटर तक सुनाई दी। चश्मदीदों के मुताबिक, अचानक एक जोरदार धमाका हुआ, जिससे लोगों को लगा मानो कोई बड़ा बम विस्फोट हो गया हो। धमाके के कुछ ही सेकंड के भीतर कोल्ड स्टोरेज की 27 साल पुरानी जर्जर इमारत का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर गया। देखते ही देखते पूरा परिसर धूल के गुबार से भर गया और चारों ओर अफरा-तफरी मच गई। हादसे के तुरंत बाद अमोनिया गैस का तेज रिसाव शुरू हो गया, जिसने स्थिति को और भी खतरनाक बना दिया। लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी और आसपास के इलाके में दहशत फैल गई।
हादसे के समय कोल्ड स्टोरेज के अंदर और आसपास करीब 110 मजदूर काम कर रहे थे। यह महज संयोग ही था कि घटना लंच टाइम के दौरान हुई, वरना मृतकों की संख्या कहीं ज्यादा हो सकती थी। ज्यादातर मजदूर खाना खाने के बाद बाहर निकल गए थे कोई चाय पीने चला गया था, कोई टहल रहा था तो कोई सुर्ती-बीड़ी के लिए बाहर गया हुआ था। लेकिन करीब 25 से 30 मजदूर ऐसे थे, जो खाना खाने के बाद ठंडी जगह पर आराम करने के लिए अंदर ही लेट गए थे। यही मजदूर इस भीषण हादसे की चपेट में आ गए और उनके ऊपर कंक्रीट की भारी छत और दीवारें काल बनकर टूट पड़ीं। मलबे के नीचे दबे लोगों की चीख-पुकार ने पूरे इलाके को दहला दिया।
हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और राहत टीमें मौके पर पहुंच गईं। रेस्क्यू ऑपरेशन युद्धस्तर पर शुरू किया गया, जिसमें जेसीबी और बुलडोजर की मदद से भारी-भरकम मलबे को हटाया जा रहा है। बचावकर्मी लगातार मलबे के नीचे फंसे लोगों को खोजने की कोशिश कर रहे हैं। मंगलवार को दूसरे दिन भी राहत और बचाव कार्य जारी रहा। अब तक इस दर्दनाक हादसे में 4 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 17 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों को इलाज के लिए स्वरूपरानी नेहरू (SRN) अस्पताल और बेली अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां वे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी हालत पर नजर बनाए हुए है।
इस हादसे की सबसे मार्मिक और दिल को झकझोर देने वाली कहानी 3 साल के मासूम कार्तिक उर्फ गुड्डू और उसकी मां रंजना की है। रंजना कोल्ड स्टोरेज में कपड़े धोने का काम करती थी और उसका बेटा कार्तिक भी उसी के साथ वहां मौजूद था। जैसे ही धमाका हुआ और इमारत गिरी, रंजना ने बिना अपनी जान की परवाह किए मलबे में छलांग लगा दी। उसने अपने बच्चे को ढूंढकर किसी तरह बाहर निकाला, लेकिन तब तक कार्तिक गंभीर रूप से घायल हो चुका था। उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। रंजना की जिंदगी पहले ही संघर्षों से भरी रही है वह अपने पति को पहले ही खो चुकी है और अब उसका इकलौता सहारा अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की जंग लड़ रहा है। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया।
हादसे के बाद प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि कोल्ड स्टोरेज की इमारत काफी पुरानी और जर्जर हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद यहां काम जारी था। इस लापरवाही को लेकर पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। इस कोल्ड स्टोरेज के मालिक समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व पशुपालन मंत्री अंसार अहमद उर्फ पहलवान हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ फाफामऊ थाने में मामला दर्ज किया है। इस FIR में उनके बेटों, मैनेजर और अन्य कर्मचारियों समेत कुल 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें 7 नामजद और 5 अज्ञात हैं। पुलिस ने अब तक अंसार अहमद के दो भतीजों सहित 4 लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि मुख्य आरोपी की तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण कार्यों और औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज की हालत लंबे समय से खराब थी और कई बार इसकी शिकायत भी की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अगर समय रहते इसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण किया गया होता, तो शायद इतनी बड़ी त्रासदी को टाला जा सकता था।
घटना के बाद पूरे प्रदेश में शोक और गुस्से का माहौल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया गया है। साथ ही प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि राहत और बचाव कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए और घायलों को बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए।
फिलहाल, राहत और बचाव कार्य जारी है और प्रशासन की टीमें हर संभव कोशिश कर रही हैं कि मलबे के नीचे दबे किसी भी व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। इस हादसे ने न सिर्फ कई परिवारों को उजाड़ दिया है, बल्कि पूरे समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक लापरवाही और अनदेखी के कारण ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। यह हादसा एक कड़वी याद बनकर रह गया है, जो आने वाले समय में सुरक्षा मानकों को लेकर सख्त कदम उठाने की जरूरत की ओर इशारा करता है।