बिहार के IAS अधिकारी संजीव हंस पर CBI का शिकंजा, 1 करोड़ रिश्वत केस में FIR दर्ज

Authored By: News Corridors Desk | 24 Mar 2026, 04:15 PM
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सीबीआई की कार्रवाई से बढ़ीं मुश्किलें

बिहार कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी संजीव हंस की परेशानियां बढ़ती नजर आ रही हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोपों में मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई एक कथित रिश्वत प्रकरण से जुड़ी है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।

केंद्र सरकार में तैनाती के दौरान का मामला

जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला उस समय का है जब संजीव हंस भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में निजी सचिव के पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि उन्होंने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया।

NCDRC में फैसले को प्रभावित करने का आरोप

एफआईआर में कहा गया है कि संजीव हंस ने नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रेड्रेसल कमीशन (NCDRC) में एक रियल एस्टेट कंपनी के पक्ष में निर्णय दिलाने के लिए कथित तौर पर रिश्वत ली। आरोप के मुताबिक, इस मामले में मुंबई स्थित एक बिल्डर समूह को राहत दिलाने की कोशिश की गई।

1 करोड़ की डील और गुप्त संपर्क

जांच में यह भी सामने आया है कि इस कथित सौदे के लिए संजीव हंस ने अपने करीबी व्यक्ति के माध्यम से बिल्डर कंपनी के प्रमोटर से संपर्क किया। सूत्रों के अनुसार, एक गोपनीय बैठक में 1 करोड़ रुपये के बदले अनुकूल आदेश दिलाने पर सहमति बनी थी।

गिरफ्तारी टलवाने के आरोप भी शामिल

एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि संजीव हंस ने अपने प्रभाव का उपयोग करते हुए संबंधित कंपनी की एक निदेशक की संभावित गिरफ्तारी को टालने में भी भूमिका निभाई। यह आरोप मामले को और गंभीर बना देता है।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज

इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी पर लगे ऐसे आरोप शासन व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े करते हैं।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल CBI ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में पूछताछ, सबूतों की जांच और संभावित कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी। यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला बड़े प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव डाल सकता है।

निष्कर्ष:

संजीव हंस से जुड़ा यह मामला न केवल एक व्यक्ति पर लगे आरोपों तक सीमित है, बल्कि यह सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और नैतिकता के महत्व को भी उजागर करता है। अब सबकी नजर CBI की आगे की कार्रवाई पर टिकी है।