Narendra Modi's big statement in Lok Sabha: पश्चिम एशिया संकट पर भारत की व्यापक रणनीति

Authored By: News Corridors Desk | 23 Mar 2026, 04:49 PM
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नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर एक विस्तृत और गंभीर बयान दिया, जिसमें उन्होंने न केवल मौजूदा हालात का आकलन प्रस्तुत किया बल्कि भारत सरकार की रणनीतिक तैयारी, कूटनीतिक प्रयासों और आर्थिक सुरक्षा उपायों का भी विस्तार से उल्लेख किया। यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब ईरान और इज़रायल के बीच बढ़ता टकराव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्थिरता पैदा कर रहा है और इसके प्रभाव दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ भारत पर भी साफ दिखाई देने लगे हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत वैश्विक परिदृश्य की गंभीरता को रेखांकित करते हुए की। उन्होंने कहा कि आज दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां क्षेत्रीय संघर्ष तेजी से वैश्विक संकट का रूप ले सकते हैं। पश्चिम एशिया में चल रहा यह संघर्ष केवल सीमित भौगोलिक दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा बाजार, सप्लाई चेन और वित्तीय स्थिरता तक फैला हुआ है। भारत, जो दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, इस स्थिति को लेकर पूरी तरह सतर्क है।

प्रधानमंत्री मोदी ने विस्तार से बताया कि हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस बैठक में इस बात का गहन विश्लेषण किया गया कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो उसका भारत की ऊर्जा जरूरतों, खाद्य सुरक्षा, उर्वरक आपूर्ति, निर्यात-आयात और घरेलू बाजार पर क्या संभावित प्रभाव पड़ सकता है। इस समीक्षा के आधार पर सरकार ने अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक रणनीतियों का खाका तैयार किया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में देश की आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मार्ग भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश के लिए आने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। वर्तमान संघर्ष के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत सरकार ने वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की पहचान कर ली है और विभिन्न देशों के साथ संपर्क बनाए रखा है, ताकि किसी भी स्थिति में देश में ईंधन की कमी न हो।

ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने खाद और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि प्रणाली काफी हद तक उर्वरकों की नियमित आपूर्ति पर निर्भर है, जिनमें से कई का आयात पश्चिम एशिया से होता है। ऐसे में सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों की खोज शुरू कर दी है और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और खाद्य सुरक्षा बनी रहे।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीयों की सहायता के लिए चौबीसों घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन स्थापित की हैं। इसके साथ ही, भारतीय दूतावासों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखते हुए हर भारतीय नागरिक तक सहायता पहुंचाएं। उन्होंने जानकारी दी कि संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीयों को सुरक्षित भारत वापस लाया जा चुका है, जो सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया और प्रभावी प्रबंधन का प्रमाण है।

प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने पश्चिम एशिया के कई देशों के शीर्ष नेताओं से सीधे संवाद किया है। इन बातचीतों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय शांति बनाए रखना और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रहा है। उन्होंने कहा कि सभी देशों ने भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है, लेकिन इसके बावजूद भारत किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है और लगातार हालात की निगरानी कर रहा है।

आर्थिक दृष्टिकोण से प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संघर्ष ने भारत के सामने कई जटिल चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। तेल और गैस की कीमतों में संभावित वृद्धि, सप्लाई चेन में बाधा, निर्यात-आयात में कमी और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन सभी पहलुओं पर बारीकी से नजर रख रही है और आवश्यकतानुसार त्वरित निर्णय लेने के लिए तैयार है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से शांति और संवाद का पक्षधर रहा है। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि वे युद्ध के रास्ते को छोड़कर बातचीत के माध्यम से समाधान खोजें। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, बल्कि इससे केवल विनाश और अस्थिरता बढ़ती है।

संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संवेदनशील समय में देश के सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को एकजुट होकर देशहित में काम करना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि भारत की संसद से एक मजबूत और एकजुट संदेश अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक जाना चाहिए, जिससे यह स्पष्ट हो कि भारत शांति, स्थिरता और वैश्विक सहयोग के पक्ष में खड़ा है।

 नरेंद्र मोदी का यह संबोधन न केवल वर्तमान संकट पर भारत की तैयारी को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी इस संघर्ष के बीच भारत ने संतुलित, सतर्क और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाते हुए अपने नागरिकों, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।