पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया समीकरण तेजी से उभर रहा है, जिसने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल बढ़ा दी है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने अब हुमायूं कबीर की 'आम जनता उन्नयन पार्टी' (AJUP) के साथ गठबंधन करने का फैसला किया है| इस गठबंधन को लेकर 25 मार्च को कोलकाता में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी, जिसमें दोनों नेता मिलकर अपनी रणनीति और सीटों के बंटवारे की पूरी रूपरेखा सामने रखेंगे। माना जा रहा है कि यह गठबंधन खास तौर पर उन क्षेत्रों में असर डाल सकता है जहां मुस्लिम वोटर्स की अच्छी-खासी संख्या है।
हुमायूं कबीर की पार्टी AJUP पहले ही यह ऐलान कर चुकी है कि वह 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 182 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। वहीं AIMIM इस गठबंधन के तहत करीब 8 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। हालांकि सीट शेयरिंग को लेकर अंतिम फैसला प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ही स्पष्ट होगा। AJUP ने अब तक 18 उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी कर दी है, जिसमें कई अहम सीटें शामिल हैं। इनमें रानीनगर, भगवानगोला और मुर्शिदाबाद जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं। ये सभी इलाके राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील माने जाते हैं और यहां का चुनावी मुकाबला हमेशा दिलचस्प रहता है।
खास बात यह है कि हुमायूं कबीर खुद भी चुनावी मैदान में सक्रिय भूमिका निभाने जा रहे हैं। वे तीन सीटों भगवानगोला, नौदा और राजीनगर से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। ये तीनों सीटें भी मुर्शिदाबाद जिले में आती हैं, जो राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AIMIM और AJUP का यह गठबंधन पश्चिम बंगाल की पारंपरिक राजनीति को चुनौती दे सकता है। अब तक राज्य में मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच देखा जाता रहा है, लेकिन इस नए गठबंधन के आने से वोटों का समीकरण बदल सकता है, खासकर अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में।
निष्कर्ष:
कि 2026 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है। नए गठबंधन, बदलते समीकरण और स्थानीय नेताओं की सक्रियता इसे और भी रोमांचक बना रही है। अब सबकी नजर 25 मार्च की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी है, जहां से इस सियासी साझेदारी की असली तस्वीर साफ होगी।