“द केरल स्टोरी 2” इस वक्त चर्चा में है। 23 फरवरी को दिल्ली में फिल्म से जुड़ी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, जिसमें फिल्म से जुड़े लोग मौजूद थे। इसके साथ ही वहां कुछ महिलाएं और परिवार भी थे, जो असल में ऐसी घटनाओं का शिकार हुए और संघर्ष के बाद अपने हिस्से की जंग लड़ कर उस दलदल से बाहर निकले। इस मौके पर नेशनल शूटर रह चुकी तारा सहदेव भी मौजूद थीं। उन्होंने अपनी सच्ची कहानी साझा की और कहा कि जो लोग फिल्म को प्रोपेगैंडा बता रहे हैं, उन्हें हमारी वास्तविक कहानियों को सुनना चाहिए। तारा ने कहा कि उनकी कहानी केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं है, बल्कि उनके जैसे कई लोगों की असल जिंदगियों की कहानी है।
तारा ने बताया कि फिल्म रिलीज़ होने से पहले उन्होंने इसके रिव्यूज़ देखे थे। कई लोग कमेंट कर रहे थे कि यह केवल अफवाह है और जानबूझकर झूठ फैलाया जा रहा है। लेकिन उनका केस 2014 का है और पूरी तरह सच है। उन्होंने कहा कि उस समय वह नेशनल शूटर थीं और अपने करियर के पीक पर थीं। उनके परफॉर्मेंस कैंप चल रहे थे, और उसी दौरान उनका सामना उस इंसान से हुआ, जिसने उनके जीवन में कई संकट लेकर आया। यह मुलाकात शूटिंग रेंज पर हुई थी, और उस व्यक्ति ने खुद को उच्च रैंक वाला ऑफिसर बताया। तारा ने बताया कि उनके लिए जो रिश्ता लाया गया, वह एक जज लेकर आए थे। उनके परिवार से मिलाने के लिए वह व्यक्ति उनके घर आया। उस समय तारा की मां का देहांत हो चुका था और पिता की तबीयत भी ठीक नहीं थी। जज ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए पिता के सामने कहा कि लड़के की मां उन्हें अपनी बेटी की तरह पालेंगी। तारा ने कहा कि वह उस समय केवल शूटिंग और पढ़ाई पर ध्यान देना चाहती थीं।
घर वालों ने पूरी जांच-पड़ताल की और उस व्यक्ति की पहचान सही पाई। उसकी हिंदू पहचान, ऑफिस और वर्क प्लेस सब कुछ ठीक बताया गया। लेकिन शादी के बाद तारा को पता चला कि उस इंसान की डबल आइडेंटिटी थी और असलियत पूरी तरह अलग थी। तारा ने बताया कि शादी से पहले सगाई उनके ससुराल घर में हुई थी। वहां पर हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार सजावट थी और घर का माहौल सामान्य लग रहा था। लेकिन शादी की रात ही उन्हें एहसास हुआ कि सब कुछ गलत था। पहले दिन तारा को बहुत डर और भ्रम हुआ। जब उन्होंने कमरे से बाहर कदम रखा, तो देखा कि घर में मक्का-मदीना का फोटो और इस्लामी प्रतीक लगे हुए थे। यह उन्हें बिल्कुल असामान्य और डरावना लगा। उनकी ससुराल की महिला ने उन्हें जोर से धक्का देकर कहा कि अब यही उनका सच है और उन्हें वहीं रहना होगा। यह पल तारा को आज भी याद है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में तारा ने जोर देकर कहा कि उनकी कहानी केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं है। यह उन महिलाओं की भी कहानी है जो धोखे, छल और झूठे रिश्तों का सामना करती हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म को केवल प्रोपेगैंडा बताना गलत है। यह उनकी और उन जैसी अन्य महिलाओं की सच्ची जिंदगियों की कहानी है। तारा ने कहा कि उन्हें यह सौभाग्य मिला है कि वे आज यहां खड़ी हैं और अपनी कहानी सीधे लोगों तक पहुंचा सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार साधारण इंसानों के जीवन में ऐसे लोग और घटनाएँ आ जाती हैं जो उनका विश्वास और सुरक्षा दोनों हिला देती हैं।
तारा ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों को केवल फिल्म या अफवाह के रूप में देखना गलत है। यह असली जिंदगी की कहानियाँ हैं, जिन्हें समाज को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई लोग फिल्मों और मीडिया को देखकर इसे झूठा मान लेते हैं, लेकिन यह वही सच्चाई है जिसे उन्होंने खुद झेला। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित अन्य लोग और परिवार भी अपनी आपबीती साझा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि फिल्म ने उनकी कहानी को एक बड़ा मंच दिया है और इसके माध्यम से लोग जान पाएंगे कि कितनी महिलाएं समाज में ऐसे संकटों का सामना करती हैं।
तारा ने अंत में कहा कि उनका संदेश केवल फिल्म या मीडिया तक सीमित नहीं है। यह उन सभी के लिए है जो अन्याय, धोखे और झूठे रिश्तों से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज को जागरूक होना चाहिए और ऐसी घटनाओं के पीड़ितों को मदद और समर्थन देना चाहिए।