शराब कारोबारी विजय माल्या एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई पोस्ट के जरिए खुद को ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर आपत्ति जताई है। माल्या का कहना है कि वह भारत आने से इनकार नहीं कर रहे हैं, बल्कि यूके की कानूनी प्रक्रिया के कारण फिलहाल उन्हें वहां से जाने की अनुमति नहीं है।
माल्या ने दावा किया कि वह 1992 से ब्रिटेन के स्थायी निवासी हैं और कानूनी तौर पर फिलहाल यूके छोड़ने से रोके गए हैं। उन्होंने इसे भारत सरकार की ओर से उनके खिलाफ शुरू से की गई गलत कार्रवाई का नतीजा बताया।
अक्टूबर 2025 में सरकार ने संसद में बताए थे 15 नाम
अक्टूबर 2025 में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में जानकारी दी थी कि फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट 2018 के तहत अब तक कुल 15 लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है।
इस सूची में विजय माल्या और नीरव मोदी समेत कई बड़े नाम शामिल हैं।
भगोड़ों को वापस लाने पर सरकार की प्रतिबद्धता
पिछले साल दिसंबर में विदेश मंत्रालय ने भी भारत में वांछित भगोड़ों को वापस लाने के मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। मंत्रालय ने कहा था कि ऐसे लोगों को भारत वापस लाकर अदालत में मुकदमे का सामना कराने की प्रतिबद्धता पूरी तरह कायम है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया था कि इस संबंध में कई देशों के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने यह भी बताया था कि पूरी प्रक्रिया में कानूनी तौर पर कई पेचीदगियां शामिल हैं, लेकिन सरकार का इरादा भगोड़ों को वापस लाने का बना हुआ है।
14,131.60 करोड़ रुपये की वसूली पर माल्या ने उठाया सवाल
मंगलवार को की गई एक अन्य पोस्ट में विजय माल्या ने बॉम्बे हाईकोर्ट में ईडी की ओर से दाखिल एक कथित हलफनामे का हवाला दिया। माल्या के मुताबिक, हलफनामे के पैरा 7 में डिक्रीड डेट यानी तय की गई देनदारी का उल्लेख है, जबकि पैरा 17 में साल 2021 में उनसे 14,131.60 करोड़ रुपये की वसूली का जिक्र किया गया है।
माल्या ने सवाल उठाया कि इतनी वसूली के बावजूद पांच साल बाद भी उन्हें बैंकों को धोखा देने वाला फ्रॉड बताया जा रहा है।
उन्होंने अपने दावों के समर्थन में वसूली से जुड़े आंकड़ों वाली एक टेबल भी शेयर की। इसी के आधार पर माल्या ने मीडिया में अपनी छवि को इस तरह खराब किए जाने पर सवाल उठाया और अपने रिफंड को लेकर सवाल नहीं उठाए जाने की बात भी कही।
कर्मचारियों के भुगतान के लिए 350 करोड़ रुपये से ज्यादा जारी करने का दावा
विजय माल्या ने यह भी दावा किया कि ईडी ने उनकी अटैच की गई संपत्ति और फंड में से किंगफिशर एयरलाइंस के कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जारी की थी।
माल्या का कहना है कि उनकी संपत्ति और फंड ईडी ने अटैच कर रखे थे, इसलिए वह खुद यह भुगतान नहीं कर पाए।
इससे पहले अगस्त में भी माल्या ने एक्स पर पोस्ट कर दावा किया था कि बैंकों और सरकार ने 6,203 करोड़ रुपये के जजमेंट डेट के मुकाबले उनसे 14,100 करोड़ रुपये वसूल लिए हैं।
फरवरी में बॉम्बे हाईकोर्ट ने माल्या को लगाई थी फटकार
इस साल फरवरी में बॉम्बे हाईकोर्ट ने विजय माल्या को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि वह जानबूझकर अदालती कार्यवाही से बचते हुए किसी तरह की राहत की उम्मीद नहीं कर सकते।
कोर्ट ने माल्या को आखिरी मौका देते हुए यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या वह भारत लौटने का इरादा रखते हैं।
माल्या की याचिका में फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट और उन्हें भगोड़ा घोषित किए जाने को चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस चंद्रशेखर की अगुवाई वाली बेंच इसी याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक्ट की संवैधानिक वैधता और उन्हें भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।
बेंच ने कहा था कि वह यह दर्ज करने की तरफ झुकी हुई है कि माल्या अदालत के क्षेत्राधिकार से बच रहे हैं। ऐसे में उन्हें अपनी याचिका में राहत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।