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अमित शाह की मौजूदगी में हुआ समझौता
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सम्राट चौधरी और हेमंत सोरेन भी थे मौजूद
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Sone River Water Dispute: बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर 25 साल से ज्यादा समय से चला आ रहा विवाद सुलझ गया है।
नई दिल्ली में सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की मौजूदगी में दोनों राज्यों के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित दोनों राज्यों तथा केंद्रीय गृह मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे।
समझौते पर हस्ताक्षर के बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुशी जताई और केंद्र व झारखंड सरकारों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी के सकारात्मक और सफल प्रयासों की बदौलत लगभग 25 वर्षों से लंबित यह महत्वपूर्ण जल समझौता आज सर्वसम्मति से स्वीकृत हुआ है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद बिहार को अपनी जरूरत के हिसाब से पानी मिलेगा और झारखंड को उसका वाजिब हिस्सा मिल सकेगा।
25 साल पुराना विवाद
सोन नदी के पानी के बंटवारे का मुद्दा 1973 के बाणसागर समझौते से जुड़ा है। उस समय, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और तत्कालीन अविभाजित बिहार के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ था, जिसमें बिहार को कुल 7.75 मिलियन एकड़-फीट (MAF) पानी आवंटित किया गया था। जब नवंबर 2000 में बिहार का पुनर्गठन हुआ और झारखंड एक अलग राज्य बना, तो सोन बेसिन का एक हिस्सा नए राज्य के क्षेत्र में आ गया। इसके बाद, झारखंड ने 7.75 MAF पानी के आवंटन में अपना हिस्सा मांगना शुरू कर दिया। स्पष्ट सहमति न बन पाने के कारण यह विवाद दशकों तक खिंचता रहा और अंतरराज्यीय जल प्रबंधन में बाधा बना रहा।
नया फार्मूला
नए फॉर्मूले के आधार पर अविभाजित बिहार के हिस्से वाले 7.75 MAF पानी में से बिहार को 5.75 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी मिलेगा, जबकि झारखंड को 2.00 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी आवंटित किया गया है। इस स्पष्ट जल बंटवारे से दोनों राज्यों के बीच दशकों से चला आ रहा असमंजस पूरी तरह समाप्त हो गया है और झारखंड को पहली बार सोन नदी के जल पर कानूनी और औपचारिक अधिकार मिल गया है।