Share Market Crash: शेयर बाजार में 6 लाख करोड़ रुपये साफ, 25 साल बाद लगातार 8वें हफ्ते गिरावट

Share Market Crash: शेयर बाजार में 6 लाख करोड़ रुपये साफ, 25 साल बाद लगातार 8वें हफ्ते गिरावट
Highlights
• सेंसेक्स 570 अंक और निफ्टी 199 अंक गिरा, बाजार में भारी बिकवाली
• निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹6 लाख करोड़ की कमी
• विदेशी निवेशकों ने एक ही दिन में ₹10,148 करोड़ के शेयर बेचे
• निफ्टी ऑटो इंडेक्स 4% से ज्यादा टूटा, महिंद्रा और मारुति पर दबाव
• 25 साल बाद शेयर बाजार लगातार 8वें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार बिकवाली के चलते निवेशकों को बड़ा झटका लगा। सेंसेक्स 570 अंक टूटकर 72,000 के नीचे बंद हुआ, जबकि निफ्टी 199 अंक गिरकर 22,421 के स्तर पर आ गया। बाजार में गिरावट के कारण बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 465 लाख करोड़ रुपये से नीचे पहुंच गया। इस दौरान निवेशकों की करीब 6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति घट गई।

कारोबार के दौरान गिरावट और भी गहरी हो गई थी। एक समय सेंसेक्स 1,200 अंक तक टूटकर 71,292 के स्तर पर पहुंच गया, जो उसका 52 हफ्ते का निचला स्तर था। उस समय निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये दांव पर थे। बाजार में बिकवाली का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दिखा, जबकि इंडिया विक्स 12 फीसदी से ज्यादा उछल गया।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार पर दबाव

शेयर बाजार में गिरावट की प्रमुख वजह विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली रही। बुधवार को विदेशी निवेशकों ने 10,148 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इस हफ्ते अब तक उनकी बिकवाली का आंकड़ा 26,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

विदेशी निवेशकों के बाजार से पैसा निकालने से निवेशकों की धारणा पर दबाव पड़ा। गुरुवार को एनएसई पर 2,789 शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते रहे, जबकि केवल 594 शेयरों में तेजी दर्ज की गई।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और रुपये की कमजोरी ने बढ़ाई चिंता

बाजार पर दबाव बढ़ने की एक अन्य वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी है। 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.31 फीसदी पर पहुंच गई, जो 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बीच निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 95.98 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया। इन परिस्थितियों ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी।

ऑटो शेयरों में भारी बिकवाली, निफ्टी ऑटो 4 फीसदी से ज्यादा गिरा

गुरुवार की गिरावट में ऑटो सेक्टर की भी बड़ी भूमिका रही। निफ्टी ऑटो इंडेक्स 4 फीसदी से ज्यादा टूट गया। महिंद्रा और मारुति सुजुकी के शेयरों में सबसे ज्यादा नुकसान देखने को मिला।

सितंबर महीने की ऑटो बिक्री के आंकड़े बाजार की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। इसका असर ऑटो कंपनियों के शेयरों पर पड़ा और सेक्टर में बिकवाली तेज हो गई।

निफ्टी ने तोड़ा 22,500 का अहम सपोर्ट लेवल

तकनीकी स्तर पर निफ्टी के लिए 22,500 का स्तर अहम माना जा रहा था। गुरुवार को यह स्तर टूट गया और इंडेक्स 22,421 पर बंद हुआ।

डेरिवेटिव रिसर्च से जुड़े जानकारों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि 22,500 का स्तर टूटने पर निफ्टी 22,400 तक फिसल सकता है। एक्सिस सिक्योरिटीज का भी मानना है कि इस अहम सपोर्ट के टूटने से बाजार में बिकवाली और तेज हुई।

लगातार आठवें हफ्ते गिरावट, 25 साल का रिकॉर्ड टूटा

भारतीय शेयर बाजार में लगातार आठवें हफ्ते गिरावट दर्ज की जा रही है। साल 2001 के डॉट-कॉम क्रैश के बाद यह पहला मौका है, जब बाजार इतने लंबे समय तक लगातार गिरावट के दौर से गुजर रहा है।

इस सिलसिले ने 2008 के वित्तीय संकट और 2020 के कोविड क्रैश के दौरान दर्ज गिरावट के दौर को भी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, विदेशी निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, लेकिन प्राइमरी मार्केट में उनका निवेश जारी है। यह बाजार में निवेश के अलग-अलग रुझानों को दिखाता है।

आगे बाजार में सुधार की क्या उम्मीद है?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट शॉर्ट टर्म फेज हो सकती है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 98 डॉलर से नीचे आने के बाद बाजार में आगे सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

जानकारों के मुताबिक, लंबी अवधि के निवेशक बड़ी कंपनियों के गुणवत्ता वाले शेयरों पर नजर रख सकते हैं। हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच किसी भी निवेश का फैसला अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

निवेश से पहले वित्तीय सलाह जरूर लें

यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से है। इसे निवेश संबंधी सलाह न माना जाए। News Corridors अपने पाठकों और दर्शकों को पैसे से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करने का सुझाव देता है।