IAS-IPS देने वाले UPSC के 100 साल पूरे होने पर क्या बोले पीएम?

IAS-IPS देने वाले UPSC के 100 साल पूरे होने पर क्या बोले पीएम?
हाइलाइट्स :
• मोदी की नसीहत
• सिविल सेवा में पद की लालसा से नहीं, जनसेवा के लिए आएं
• UPSC चयन प्रक्रिया में भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बदलाव जरूरी
• समय से और कम समय में परीक्षा कराने पर दिया जोर

Modi on UPSC Recruitment Process: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोगों से भविष्य की जरूरतों के अनुरूप चयन मानदंड और भर्ती प्रक्रिया में आवश्यक बदलाव करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने गुरुवार 01 सितंबर 2026 को दिल्ली के भारत मंडपम में संघ लोक सेवा आयोग UPSC के शताब्दी समारोह Centenary Programe को संबोधित किया। 
पीएम ने कहा कि चयन प्रक्रिया में केवल शैक्षणिक ज्ञान नहीं, बल्कि जनसेवा की प्रेरणा, जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता और भविष्य की चुनौतियों को समझने की क्षमता को भी परखा जाना चाहिए। 

डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी

पीएम  ने यूपीएससी यानी संघ लोक सेवा आयोग के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया गया। इसके साथ ही एक विशेष पुस्तक का भी विमोचन किया गया। 

अफसर चयन पर बोले पीएम

उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में ऐसे अधिकारियों के चयन पर जोर दिया जो समस्याओं का पहले से अनुमान लगाएं, नए समाधान खोजें और कानूनों के असर को नागरिकों के नजरिये से समझें। 

पद की नहीं, जन सेवा की भावना से  आएं

 प्रधानमंत्री  ने कहा कि देश को ऐसे युवाओं को लोक सेवाओं में लाना चाहिए, जो सरकारी पद से नहीं, बल्कि जनसेवा से आकर्षित हों। यह इसलिए जरूरी है कि भर्ती परीक्षा में केवल यह न परखा जाए कि अभ्यर्थी को क्या पता है, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि वह युवा सिविल सेवाओं में क्यों आना चाहता है?

नेताजी ने संस्कृत में परीक्षा दी थी

प्रधानमंत्री के अनुसार, गैलरी में उन्होंने देखा कि वर्ष 1920 में सुभाष चंद्र बोस भी इसी चयन प्रक्रिया से गुजरे थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में अंग्रेजों का शासन था, लेकिन परीक्षा में संस्कृत का पेपर भी हुआ करता था और सुभाष बाबू ने संस्कृत में परीक्षा दी थी।

परीक्षाएं समय से कराएं

प्रधानमंत्री ने परीक्षाओं को कराने में लगने वाले समय को कम करने पर जोर देते हुए कहा कि यह एक बहुत अहम विषय है। प्रधानमंत्री ने कहा कि परीक्षा को हमें केवल एक इवेंट की तरह नहीं देखना है। ये इवेंट से कहीं अधिक युवाओं के भविष्य से, उनके जीवन से जुड़ा हुआ विषय है। 

परीक्षा में देरी से आर्थिक बोझ बढ़ता है

मोदी ने कहा कि परीक्षाओं में कुछ महीनों की देरी युवाओं के लिए बड़ा संकट बन सकती है। कोचिंग की फीस, रेंट, ट्रांसपोर्ट का खर्च, ये बहुत बड़ा बोझ उस परिवार पर होता है। इसलिए, देश के सभी चयन आयोगों को, ये सुनिश्चित करना होगा, कि कसौटी में कमी किए बिना, हमारी एग्जामिनेशन साइकिल छोटी कैसे हो? 

चुनौतियों से निबटना होगा

भविष्य के सिविल सेवकों को सूचना युद्ध, डीपफेक, एल्गोरिदम आधारित पक्षपात और जलवायु न्याय जैसी नई चुनौतियों से भी निपटना होगा। इसके लिए चयन प्रक्रिया में जटिल समस्या समाधान और दूरदृष्टि को प्राथमिकता देनी होगी। 

महिलाओं की भागीदारी 3 से 30 प्रतिशत हुई

प्रधानमंत्री ने कहा कि 1952 में सिविल सेवा में महिला अभ्यर्थियों की हिस्सेदारी तीन प्रतिशत थी, जो अब 30 प्रतिशत से अधिक हो गई है। वर्ष 2014 के बाद आयोग की चार में से तीन अध्यक्ष महिलाएं रही हैं। वर्ष 1976 में आयोग की 50वीं वर्षगांठ के समय की तुलना में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 45 गुना बढ़ी है। इस आयोग का गठन 1 अक्टूबर 1926 को हुआ था।