NEET PG में बड़ा बदलाव संभव, पर्सेंटाइल की जगह लागू हो सकता है रैंक सिस्टम

NEET PG में बड़ा बदलाव संभव, पर्सेंटाइल की जगह लागू हो सकता है रैंक सिस्टम

NEET PG Rank System, NEET PG Admission, Percentile Cutoff: मेडिकल की स्नातकोत्तर (पीजी) सीटों पर दाखिले की व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो सकता है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट पीजी) में अब तक लागू पर्सेंटाइल आधारित पात्रता व्यवस्था को समाप्त कर रैंक आधारित मेरिट सिस्टम लागू करने की तैयारी है। नीट पीजी प्रवेश प्रणाली की समीक्षा के लिए गठित 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह सुझाव दिया है। समिति ने यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है। खबरों के मुताबिक, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने नीट पीजी के साथ सुपर स्पेशियलिटी प्रवेश परीक्षा (नीट एसएस) के लिए भी इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

पर्सेंटाइल की जगह रैंक आधारित मेरिट का सुझाव

विशेषज्ञ समिति का मानना है कि दाखिला प्रक्रिया में पर्सेंटाइल आधारित पात्रता के बजाय उम्मीदवारों की रैंक को आधार बनाया जाना चाहिए। इससे मेडिकल पीजी और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों में प्रवेश की व्यवस्था को नए सिरे से निर्धारित किया जा सकेगा।

रिपोर्ट में दाखिला प्रक्रिया में सुधार के साथ मेडिकल शिक्षा के न्यूनतम मानकों को बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। प्रस्ताव के तहत पात्रता और मेरिट तय करने की व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है। हालांकि, नई व्यवस्था किस रूप में लागू होगी और उसके मानक क्या होंगे, यह मसौदा नियम जारी होने के बाद स्पष्ट होगा।

जल्द जारी हो सकते हैं मसौदा नियम

इस प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया के तहत जल्द मसौदा नियम जारी किए जाने की उम्मीद है। इसके बाद मेडिकल शिक्षा से जुड़े संस्थानों, अभ्यर्थियों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव और राय मांगी जाएगी। प्राप्त सुझावों के आधार पर नियमों को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

यदि प्रस्ताव लागू होता है तो नीट पीजी और नीट एसएस की प्रवेश प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे दाखिले के लिए पात्रता तय करने और उम्मीदवारों की मेरिट निर्धारित करने का मौजूदा तरीका बदल जाएगा।

नीट पीजी 2025 की कटऑफ में भारी कमी से उठा विवाद

यह मामला नीट पीजी 2025 की पात्रता के लिए निर्धारित कटऑफ पर्सेंटाइल में बड़ी कटौती के बाद चर्चा में आया था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने खाली पड़ी पीजी मेडिकल सीटों को भरने के उद्देश्य से क्वालिफाइंग स्कोर में भारी कमी की थी।

सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए क्वालिफाइंग स्कोर 276 से घटाकर 103 कर दिया गया था। वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह स्कोर 235 से घटाकर माइनस 40 कर दिया गया था। इस फैसले को लेकर सवाल उठे थे कि इतनी कम पात्रता के आधार पर मेडिकल पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिला देने से शिक्षा के मानकों पर क्या असर पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने भी जताई थी चिंता

पात्रता पर्सेंटाइल में इतनी बड़ी कमी पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाए थे। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कटऑफ में की गई भारी कटौती पर चिंता जताई थी।

इसके बाद शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को मौजूदा नीट दाखिला व्यवस्था का व्यापक ऑडिट करने, उसकी कमियों की पहचान करने और व्यावहारिक समाधान सुझाने का निर्देश दिया था। इसी निर्देश के तहत 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की गई थी। समिति की ओर से दाखिल रिपोर्ट में पर्सेंटाइल आधारित व्यवस्था के स्थान पर रैंक आधारित मेरिट सिस्टम अपनाने का सुझाव दिया गया है।