एशियाई खेलों में भारत का गोल्डन धमाका, हॉकी में 44 साल का सूखा खत्म कर बेटियां चैंपियन

एशियाई खेलों में भारत का गोल्डन धमाका, हॉकी में 44 साल का सूखा खत्म कर बेटियां चैंपियन
  • चीन को 1-0 से हराकर भारत ने रचा इतिहास
  • अंकुश पंघाल ने 80 किलो वर्ग में जीता स्वर्ण
  • बॉक्सिंग में भारत ने तीन गोल्ड और तीन कांस्य जीते
  • लवलीना और परवीन के बाद अंकुश ने भी जीता स्वर्ण

Asian Games India Gold: जापान में चल रहे एशियन्स गेम्स में शुक्रवार का दिन भारत के लिए बेहद शुभ रहा। भारत की बेटियों ने 44 साल का सूखा समाप्त करते हुए हॉकी में गोल्ड जीत लिया। वहीं, भारतीय मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीतकर भारत को मुक्केबाजी में स्वर्णिम हैट्रिक दिला दी। 

पूरे देश की निगाहें महिला हॉकी टीम पर लगी थी। भारत ने चीन को फाइनल में 1-0 से हरा दिया । भारत ने इस तरह 1982 के बाद पहली बार एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता है। भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 साल का सूखा समाप्त किया।

ओलंपिक के लिए क्वालीफाई

इस जीत के साथ ही भारतीय महिला हॉकी टीम ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर लिया है। भारतीय टीम ने पहले क्वार्टर में बढ़त हासिल की और अंत तक इस बढ़त को बनाए रखा। भारत ने ना सिर्फ स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि चीन को स्वर्ण का बचाव करने से रोका।

शुरुआत से बनाया दबाव

भारतीय टीम ने चीन के खिलाफ पहले क्वार्टर से दबाव बनाया। बलजीत कौर को छठे मिनट में ग्रीन कार्ड मिला। लेकिन भारत ने चीन पर दबाव बनाया और भारत के लिए 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहीं लालरेमसियामी ने 10वें मिनट में निर्णायक मैदानी गोल दाग दिया।  भारत को इसके बाद पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन भारतीय टीम बढ़त दोगुना करने से चूक गई। हालांकि, पहला क्वार्टर समाप्त होने तक भारतीय टीम बढ़त बनाए रखी ।

जाम में फंस गई टीमें, एक घंटे देरी से हुआ फाइनल

भारत और चीन के बीच एशियन गेम्स में महिला हॉकी का फाइनल एक घंटे विलंब से शुरू हुआ क्योंकि टीमों की बसें रास्ते में ट्रैफिक में फंस गई। एक अधिकारी ने बताया कि रास्ते में एक हादसे की वजह से यह जाम लगा था हालांकि इसका टीम बसों से कोई सरोकार नहीं था। इस जाम की वजह से खिलाड़ी स्टेडियम देर से पहुंचे। मैच भारतीय समयानुसार दोपहर 3:30 बजे से शुरू होना था, लेकिन ये 4:30 बजे से शुरू हुआ।

1982 के बाद मिला गोल्ड

भारत ने एशियाई खेलों में एकमात्र स्वर्ण 1982 में दिल्ली में जीता था जब महिला हॉकी को पहली बार इन खेलों में शामिल किया गया था। उसके बाद से भारत 1998 और 2018 में फाइनल में पहुंचा लेकिन क्रमश: दक्षिण कोरिया और जापान से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। भारत और चीन के बीच अब तक 28 मुकाबले हुए हैं जिनमें से 12 चीन ने और 11 भारत ने जीते, जबकि पांच मैच ड्रॉ रहे।

मुक्केबाजों का गोल्डन पंच, अंकुश की हैट्रिक

भारतीय मुक्केबाजी के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। एशियाई खेलों में अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीतकर भारत को मुक्केबाजी में स्वर्णिम हैट्रिक दिला दी।

नागोया के निशियो जिम्नेजियम में खेले गए फाइनल में अंकुश ने दक्षिण कोरिया के किम मिनसियोंग को 4-0 से हराया। उनकी जीत के साथ भारत का मुक्केबाजी अभियान तीन स्वर्ण और तीन कांस्य पदकों के साथ समाप्त  हुआ।

हिसार का चमका बेटा

अंकुश की जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि 80 किलोग्राम वर्ग में यह एशियाई खेलों में भारत का पहला स्वर्ण पदक है। हिसार के रहने वाले अंकुश ने कम उम्र में ही मुक्केबाजी में अपनी अलग पहचान बनाई है।

परवीन और लवलीना भी चमकी

अंकुश से पहले शुक्रवार को परवीन हुड्डा ने महिलाओं के 65 किलोग्राम वर्ग में और लवलीना बोरगोहेन ने 75 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीता। परवीन ने चीनी ताइपे की चेन निएन-चिन को 3-2 से हराया, जबकि लवलीना ने चीन की बाओ जियी को 5-0 से शिकस्त दी।

तीन कांस्य भी झोली में आए

भारत के तीन कांस्य पदक कपिल पोखरिया, नरेंद्र बरवाल और प्रियंका घंघास ने जीते। इस तरह 11 भारतीय मुक्केबाजों में से छह पदक जीतने में सफल रहे और भारत ने छह पदकों के साथ अपना अभियान समाप्त किया।