बाल यौन शोषण-रेप केसों में जल्द मिलेगा न्याय, 850 फास्ट-ट्रैक कोर्ट को केंद्र की मंजूरी

बाल यौन शोषण-रेप केसों में जल्द मिलेगा न्याय, 850 फास्ट-ट्रैक कोर्ट को केंद्र की मंजूरी
  • फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की योजना 2031 तक जारी रहेगी
  • कैबिनेट ने 3,788 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय को मंजूरी दी
  • देश में 850 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें संचालित करने का लक्ष्य
  • निर्भया फंड से केंद्र सरकार के हिस्से का वित्तपोषण होगा
  • योजना शुरू होने के बाद 4.02 लाख मामलों का निपटारा

Union Cabinet Approval for Fast Track Special Courts POCSO Act: महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (एफटीएससी) की योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए केंद्र प्रायोजित योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी। इस योजना पर कुल 3,788.04 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 2,353.15 करोड़ रुपये और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का हिस्सा 1,434.89 करोड़ रुपये होगा। केंद्र का वित्तीय योगदान निर्भया फंड से किया जाएगा।

850 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें होंगी संचालित

कैबिनेट की मंजूरी के बाद देश में विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित कुल 850 फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 779 एफटीएससी कार्यरत हैं, जिनमें 399 विशेष पॉक्सो न्यायालय शामिल हैं। नई योजना के तहत इनकी संख्या बढ़ाकर 850 की जाएगी। अतिरिक्त अदालतें उन जिलों में स्थापित की जाएंगी, जहां दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत लंबित मामलों का बोझ अधिक है।

सरकार का उद्देश्य अदालतों की संख्या बढ़ाकर लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाना और पीड़ितों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। इसके लिए संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय कर न्यायालयों का विस्तार किया जाएगा।

प्रत्येक अदालत में न्यायिक अधिकारी और छह कर्मचारी

योजना के तहत प्रत्येक फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय में एक समर्पित न्यायिक अधिकारी, विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था की जाएगी। इससे अदालतों के प्रशासनिक कामकाज को सुचारु बनाने और मामलों की सुनवाई में तेजी लाने में मदद मिलेगी। विशेष लोक अभियोजक संबंधित मामलों की पैरवी करेंगे, जबकि सहायक कर्मचारी न्यायिक प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में सहयोग करेंगे।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को योजना के निर्धारित वित्तीय पैटर्न के अनुसार अदालतों के संचालन के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उपयोग न्यायालयों के परिचालन खर्च और आवश्यक मानव संसाधनों की व्यवस्था में किया जाएगा।

अब तक 4.02 लाख मामलों का निपटारा

फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों की योजना दो अक्टूबर 2019 को शुरू की गई थी। इसके बाद से इन अदालतों ने दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के निपटारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। योजना शुरू होने के बाद से अब तक 4,02,457 मामलों का निपटारा किया जा चुका है।

इस योजना को शुरुआत में एक वर्ष के लिए लागू किया गया था। बाद में इसकी अवधि बढ़ाकर 31 मार्च 2026 तक कर दी गई थी। अब कैबिनेट की मंजूरी से इसे 31 मार्च 2031 तक जारी रखने का रास्ता साफ हो गया है।

बच्चों के अनुकूल अदालतों पर विशेष जोर

सरकार ने योजना के तहत बच्चों और यौन अपराधों के पीड़ितों के अनुकूल न्यायिक वातावरण तैयार करने पर भी जोर दिया है। इसके लिए कमजोर गवाह बयान केंद्रों (वीडब्ल्यूडीसी) और बच्चों के अनुकूल अदालतों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे पीड़ितों को बिना अतिरिक्त मानसिक आघात के अपनी गवाही देने में सहायता मिलेगी।

योजना का प्रमुख उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को पीड़ित-केंद्रित बनाना और संवेदनशील मामलों की सुनवाई के दौरान उनकी सुरक्षा एवं गरिमा सुनिश्चित करना है।

न्याय विभाग करेगा अदालतों के कामकाज की निगरानी

योजना का कार्यान्वयन न्याय विभाग संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के समन्वय से करेगा। अदालतों के प्रदर्शन की निगरानी एफटीएससी डैशबोर्ड, आवधिक प्रगति रिपोर्ट और राज्यों के व्यय विवरण के माध्यम से की जाएगी। इसके अलावा उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों से नियमित परामर्श लेकर योजना के प्रभावी संचालन की समीक्षा भी होगी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई थी योजना

फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों की केंद्र प्रायोजित योजना आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 के तहत शुरू की गई थी। दो अक्टूबर 2019 को इसकी शुरुआत हुई थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2019 को स्वत: संज्ञान रिट (आपराधिक) संख्या 1/2019 में उन जिलों में विशेष पॉक्सो अदालतें स्थापित करने का निर्देश दिया था, जहां पॉक्सो अधिनियम के तहत 100 से अधिक मामले लंबित थे।