पश्चिम बंगाल में चुनाव नजदीक आते ही माहौल काफी गरम हो गया है। इसी बीच Election Commission of India ने बड़ा कदम उठाते हुए पुलिस प्रशासन में कई अहम बदलाव किए हैं। इस फैसले के तहत कोलकाता पुलिस और राज्य पुलिस में कुल 12 अधिकारियों का तबादला किया गया है। इसका मकसद चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराना है।
इस निर्णय के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। कोलकाता पुलिस में कई वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पदों से हटाकर नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि चुनाव आयोग किसी भी तरह की लापरवाही नहीं चाहता और पूरी सख्ती के साथ काम कर रहा है।
सबसे बड़े बदलावों में CID की डीआईजी सोमा दास मित्रा का नाम शामिल है। उन्हें अब कोलकाता पुलिस में संयुक्त आयुक्त (अपराध) बनाया गया है। वहीं, सुदीप सरकार, जो पहले डीआईजी (कार्मिक) के पद पर थे, उन्हें संयुक्त आयुक्त (मुख्यालय) की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके अलावा, विशेष कार्य बल की डीआईजी देबास्मिता दास को संयुक्त आयुक्त (खुफिया) नियुक्त किया गया है। यह सभी नियुक्तियां ऐसे समय में की गई हैं जब चुनाव के कारण सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
चुनाव आयोग ने कोलकाता पुलिस के चार बड़े डिवीजनों उत्तर, दक्षिण, पूर्व और दक्षिण-पूर्व—के उपायुक्तों को भी उनके पदों से हटा दिया है। उनकी जगह नए अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। वीएसआर अनंतनाग को उपायुक्त (दक्षिण) बनाया गया है, जबकि प्रदीप कुमार यादव को उपायुक्त (उत्तर) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
भंगार डिवीजन के डीसी सैकत घोष का तबादला कर उन्हें दक्षिण-पूर्व डिवीजन का डीसी बनाया गया है। वहीं, उग्रवाद निरोधक बल के एसपी प्रशांत चौधरी को कोलकाता पुलिस में डीसी (पूर्व) नियुक्त किया गया है।
यह बदलाव सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं हैं। राज्य के कई अन्य जिलों और पुलिस आयुक्तालयों में भी अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इससे यह साफ होता है कि चुनाव आयोग पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रशासनिक बदलाव चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी होते हैं। जब नए अधिकारी आते हैं, तो वे बिना किसी दबाव के काम कर पाते हैं और चुनाव सही तरीके से हो पाता है।